- ट्रायल में देरी न हो और गवाहों को समय पर पेश किया जाए
- पुलिस जरूरी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए जाएं ताकि सुनवाई आगे बढ़ सके
- छापेमारी में ईडी को मिले थे 17 रजिस्टर, कई जमीन के दस्तावेज और 11 ट्रंकों में रिकॉर्ड
- दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर असली जमीन मालिकों के रिकॉर्ड फर्जी तरीके से बदल दिए गए थे
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपी बड़गाई अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी (CI) भानु प्रताप प्रसाद की जमानत याचिका खारिज कर दी. सुनवाई हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत में हुई.
कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी पर गंभीर आरोप हैं और केवल लंबे समय से हिरासत में रहना जमानत देने का आधार नहीं हो सकता. हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मामले के ट्रायल में देरी न हो और गवाहों को समय पर पेश किया जाए. साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया कि जरूरी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए जाएं ताकि सुनवाई आगे बढ़ सके.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रार्थी 18 जुलाई 2023 से जेल में है और इस मामले में अधिकतम सजा 7 साल है. साथ ही यह भी बताया गया कि मनी लांड्रिंग के मामलों में ईडी द्वारा दर्ज केस में प्रार्थी को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है.
वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी के पास से 17 रजिस्टर, कई जमीन के दस्तावेज और 11 ट्रंकों में रिकॉर्ड मिले थे, जिनमें छेड़छाड़ कर असली जमीन मालिकों के रिकॉर्ड फर्जी तरीके से बदल दिए गए थे. यह भी बताया गया कि मामले में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं लगी हैं, जिनमें सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है.
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