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Court News : चार सब-रजिस्ट्रार व जिला सब-रजिस्ट्रार को HC से राहत, विभागीय कार्यवाही रद्द

कोर्ट-कचहरी की खबरें
  • धनबाद निबंधन कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में भूमि निबंधन एवं म्यूटेशन में कथित गड़बड़ियों का मामला

Ranchi : भूमि निबंधन में कथित अनियमितताओं के मामले मे धनबाद के चार सब-रजिस्ट्रार/जिला सब-रजिस्ट्रार को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने भूमि निबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोप में चार सब-रजिस्ट्रार/जिला सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही को रद्द कर दिया है.

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कोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी नियमावली, 1959 के नियम 58 के अनुसार रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की शुद्धता की जिम्मेदारी राजस्व अधिकारी की है, रजिस्ट्रार की नहीं है. कोर्ट ने चारों मामलों में विभागीय कार्यवाही शुरू करने की अधिसूचना और आरोप-पत्र को रद्द करते हुए सभी रिट याचिकाएं स्वीकार कर लीं. 

 

कोर्ट ने संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी की ओर से दायर चार अलग-अलग रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाया. सभी याचिकाओं में विभागीय कार्यवाही शुरू करने की अधिसूचना और आरोप-पत्र (चार्ज मेमो) को चुनौती दी गई थी.
 

निबंधन पदाधिकारी का दायित्व रिकॉर्ड की सत्यता की जांच करना नहीं

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने कहा कि निबंधन पदाधिकारी का दायित्व संपत्ति के स्वामित्व (टाइटल) या खाता-प्लॉट के रिकॉर्ड की सत्यता की जांच करना नहीं है. ऐसे में केवल इस आधार पर विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती कि निबंधित दस्तावेजों में पुराने और नए सर्वे खाता- प्लॉट नंबरों में विसंगति थी.

 

दरअसल, मामले में 7 अगस्त 2020 को धनबाद निबंधन कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में भूमि निबंधन एवं म्यूटेशन में कथित गड़बड़ियों की शिकायत हुई थी. जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों को पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया और बाद में वर्ष 2023 और 2025 में चार्ज मेमो जारी कर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी.

 

अनुचित लाभ पहुंचाने या व्यक्तिगत लाभ लेने का नहीं लगा था आरोप 

हाईकोर्ट ने पाया कि किसी भी याचिकाकर्ता पर भ्रष्टाचार, मिलीभगत, दुर्भावना, अनुचित लाभ पहुंचाने या व्यक्तिगत लाभ लेने का कोई आरोप नहीं लगाया गया है. आरोप केवल इस बात तक सीमित थे कि उन्होंने दस्तावेजों में दर्ज खाता-प्लॉट विवरण का सत्यापन नहीं किया, जबकि ऐसा करना उनके वैधानिक दायित्व में शामिल ही नहीं था.

 

कोर्ट ने कहा कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 21 के तहत निबंधन पदाधिकारी का काम केवल यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज में संपत्ति का विवरण पहचान के लिए पर्याप्त हो. उसे संपत्ति के स्वामित्व या रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की सत्यता की जांच करने का कोई वैधानिक अधिकार या दायित्व नहीं है.

 

क्या हैं मामला

7 अगस्त 2020 को सामाजिक कार्यकर्ता बताकर राकेश कुमार राही द्वारा शिकायत की गई थी कि धनबाद के जिला अवर निबंधक कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में भूमि निबंधन और म्यूटेशन में अनियमितताएं हुई हैं. शिकायत के आधार पर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने 19 अगस्त 2020 को धनबाद के उपायुक्त को जांच कराने का निर्देश दिया.

 

उप समाहर्ता एवं दो कार्यपालक दंडाधिकारियों की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. जांच में आरोप लगाया गया कि कई बिक्री विलेखों (Sale Deeds) में पुराने सर्वे खाता एवं प्लॉट नंबर और नए सर्वे खाता एवं प्लॉट नंबर में मेल नहीं था. साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि निबंधन के साथ संलग्न दस्तावेजों का संबंधित अंचल कार्यालय से सत्यापन नहीं कराया गया.

 

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