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Court News: समान वरिष्ठता की मांग वाली प्रार्थियों की याचिका पर HC ने फैसला रखा सुरक्षित

ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (विज्ञापन संख्या 21/2016) नियुक्ति परीक्षा में प्रशासनिक कारणों से देर से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की ओर से समान वरिष्ठता  का आग्रह करने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.
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Ranchi: ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (विज्ञापन संख्या 21/2016) नियुक्ति परीक्षा में प्रशासनिक कारणों से देर से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की ओर से समान वरिष्ठता  का आग्रह करने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया. 

 

दरअसल,  प्रार्थियों ने इसी नियुक्ति परीक्षा से उनसे पहले नियुक्त हुए उम्मीदवारों के बराबर उनकी भी वरिष्ठता मानी जाने का आग्रह किया है. कहा है कि उनकी नियुक्ति भले ही देरी से हुई हो लेकिन वह भी उसी परीक्षा से नियुक्त हुए हैं जिससे उनके समकक्ष अभ्यर्थी वर्ष 2019 में नियुक्त हुए थे. इसलिए पूर्व में नियुक्त उम्मीदवारों की नियुक्ति की तिथि से उन्हें  नियुक्त माना जाए.

 

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि कि प्रार्थियों की कोई गलती न होने के बावजूद, सरकार की ओर से हुई लापरवाही के कारण उनकी नियुक्ति में 3 साल का विलंब हुआ है. इस संबंध में कोर्ट से कोई स्टे आदेश पारित नहीं था, प्रशासनिक कारणों से प्रार्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने में देरी हुई थी.

 

देरी होने पर जब प्रार्थियों ने अपना नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए कोर्ट में रिट याचिका दायर की, तो उन्हें नियुक्त किया गया था.  ऐसे में इसी परीक्षा से नियुक्त उनके समकक्ष अभ्यर्थी वरिष्ठता में उनसे आगे हो गए हैं. पहले नियुक्त हुए उम्मीदवारों को 2019 में नियुक्ति दी गई थी. प्रार्थियों की भी नियुक्ति तिथि वर्ष 2019 से माना जाना चाहिए.  ताकि वे अपने समकक्ष अभ्यर्थियों से वरिष्ठता में पीछे ना हो.

 

सुनवाई के दौरान प्रार्थियों के अधिवक्ता ने  सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णयों का हवाला भी दिया. कहा गया कि इसी तरह के मामले में, काल्पनिक वरिष्ठता प्रदान करने के निर्देश जारी किए जाएं, अन्यथा वे बिना किसी गलती के अपने सहकर्मियों से कनिष्ठ हो जाएंगे.

 

वहीं, राज्य सरकार की ओर से याचिकाकर्ताओं की आग्रह का विरोध किया है. दरअसल, सभी प्रार्थी झारखंड के गैर-अनुसूचित जिलों जैसे पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, कोडरमा आदि से संबंधित हैं.

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