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Court News : CPI माओवादी संगठन से जुड़े आरोपी की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज

Ranchi : एनआईए द्वारा दर्ज यूएपीए (UAPA) मामले में आरोपी अभिनव उर्फ गौरव कुमार की जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने NIA के विशेष न्यायाधीश द्वारा आरोपी अभिनव की जमानत खारिज करने का आदेश बरकरार रखा. NIA की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास एवं अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा.
 
कोर्ट-कचहरी की खबरें
  • कोर्ट ने कहा- आरोपी पर नक्सली संगठन के लिए फंड  जुटाने  की व्यापक साजिश में शामिल होने का है आरोप 
  • NIA का तर्क, आरोपी माओवादी संगठन के लिए लेवी जुटाता था, पूर्व माओवादी कैडरों को संगठन के पुनर्जीवन के लिए करता था प्रेरित 

Ranchi : एनआईए द्वारा दर्ज यूएपीए (UAPA) मामले में आरोपी अभिनव उर्फ गौरव कुमार की जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने NIA के विशेष न्यायाधीश द्वारा आरोपी अभिनव की जमानत खारिज करने का आदेश बरकरार रखा. NIA की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास एवं अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा.

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खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के विरुद्ध पूरक आरोपपत्र में विस्तृत भूमिका दर्शायी गई है. सह-अभियुक्तों के घर की तलाशी के दौरान आरोपी की उपस्थिति दर्ज हुई. CFSL, कोलकाता की फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार कई जब्त पत्र आरोपी के लिखे हुए पाए गए. आरोपी के वॉयस क्लिप से यह सामने आया कि वह मुख्य आरोपी तरुण कुमार (आरोपी संख्या -1) एवं अन्य आरोपियों के नियमित संपर्क में था.


उपलब्ध साक्ष्य प्रथमदृष्टया आरोपी की गंभीर भूमिका दर्शाती है 

कोर्ट ने कहा कि आनंद पासवान का मामला अलग था क्योंकि उसके विरुद्ध केवल हथियार बरामदगी का आरोप था, जबकि वर्तमान अपीलकर्ता पर नक्सली संगठन के वित्तपोषण की व्यापक साजिश में शामिल होने का आरोप है. कोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की गंभीर भूमिका दर्शाते हैं. इसलिए हिरासत की अवधि मात्र के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती.


आरोपी की दलील- केवल संदेह के आधार पर उसे फंसाया गया

कोर्ट में अपीलकर्ता की दलील थी कि केवल संदेह के आधार पर उसे फंसाया गया है. एक सह-अभियुक्त आनंद पासवान को जमानत मिल चुकी है. 3 जनवरी 2023 से वह जेल में है और मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है. 


आरोपी फंडिंग नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था

वहीं, NIA की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास एवं अधिवक्ता सौरव कुमार ने कोर्ट को बताया कि आरोपी केवल नाममात्र का सदस्य नहीं था, बल्कि फंडिंग नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था. वह माओवादी संगठन के लिए धन जुटाने और संपर्क स्थापित करने का कार्य करता था. 76 गवाहों में से 24 गवाहों की गवाही अभी शेष है.


प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था आरोपी 

NIA के अनुसार, आरोपी प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) से जुड़ा था. आरोप है कि वह माओवादी संगठन के लिए फंड (लेवी) जुटाता था. पूर्व माओवादी कैडरों को संगठन के पुनर्जीवन के लिए प्रेरित करता था. बिहार और झारखंड के मगध आम्रपाली जोन में माओवादी ऑपरेटिवों एवं अन्य लोगों के बीच कड़ी के रूप में कार्य करता था. स्थानीय ठेकेदारों से धन एकत्र करता था, जिसका उपयोग नक्सली गतिविधियों में होना था.

 

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