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श्री सर्वेश्वरी समूह सोगड़ा आश्रम की नई पहल : जशपुर में पहली बार शुरू हुई पिपरमिंट की खेती

  • श्री सर्वेश्वरी समूह सौगड़ा आश्रम का किसानों के लिए नया प्रयोग
  • ग्रीन टी सहित अन्य चीजों के बाद अब पिपरमिंट की खेती

Lagatar Desk :  श्री सर्वेश्वरी समूह सोगड़ा आश्रम ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक और लाभकारी खेती से जोड़ने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है. आश्रम की पहल पर जशपुर जिले में पहली बार पिपरमिंट की व्यावसायिक खेती शुरू की गई है.

 

इस नई पहल को जिले के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है. आश्रम की ओर से फिलहाल प्रयोग के तौर पर 5 एकड़ भूमि में पिपरमिंट की खेती की गई है. इस पहल का उद्देश्य किसानों को ऐसी नकदी फसल से जोड़ना है, जिसमें कम लागत और जोखिम में बेहतर मुनाफा कमाया जा सके.

 

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पहले भी किए हैं कई सफल प्रयोग

श्री सर्वेश्वरी समूह सोगड़ा आश्रम लंबे समय से किसानों के लिए नई खेती की तकनीकों और वैकल्पिक फसलों पर काम करता रहा है. पिपरमिंट से पहले आश्रम में ग्रीन टी समेत कई नई फसलों की सफल खेती की जा चुकी है. अब पिपरमिंट की खेती को भी किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. 

 

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90 दिन में तैयार होगी फसल

आश्रम से जुड़े मानस सिंह ने बताया कि पिपरमिंट की फसल लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस फसल को मवेशी नुकसान नहीं पहुंचाते, इसलिए खेत की घेराबंदी पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता. इसके अलावा पौधे का लगभग हर हिस्सा उपयोगी होता है, जिससे किसानों को घाटे की गुंजाइश न के बराबर होती है.

 

दवा और कॉस्मेटिक उद्योग में है बड़ी मांग

पिपरमिंट एक बहुउपयोगी फसल है, जिसकी देश-विदेश के बाजारों में सालभर मांग बनी रहती है. इसका उपयोग बड़े पैमाने पर जीवन रक्षक दवाओं, कफ सिरप, पेन किलर बाम सहित विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों को बनाने में होता है. इसके अलावा टूथपेस्ट, माउथवॉश, साबुन, शैंपू, फेसमास्क सहित कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के निर्माण में इसका इस्तेमाल किया जाता है.

 

तेल के साथ सूखे पत्तों की भी हाई डिमांड

इस खेती की सबसे खास बात यह है कि फसल तैयार होने के बाद जहां एक तरफ वैज्ञानिक विधि से पिपरमिंट के पौधों से कीमती तेल (मेन्था ऑयल) निकाला जाएगा. वहीं दूसरी ओर इसके सूखे पत्तों की भी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. 

 

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल

आश्रम का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो जिले के किसान पारंपरिक फसलों के साथ पिपरमिंट जैसी नकदी फसलों की खेती कर अच्छी कमाई कर सकेंगे. इससे खेती की लागत कम होगी . श्री सर्वेश्वरी समूह सौगड़ा आश्रम को उम्मीद है कि पिपरमिंट की खेती जिले में एक नई कृषि क्रांति की शुरुआत साबित होगी.

 

 

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