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सांसद BD राम ने VC दिनेश सिंह के खिलाफ फिर की राज्यपाल से शिकायत

सांसद बीडी राम ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के VC दिनेश सिंह के खिलाफ राज्यपाल से फिर शिकायत की है. उन्होंने VC द्वारा A. K. Singh College के विज्ञान संकाय, गणित और दर्शनशास्त्र में नामांकन की अनुमति नहीं देने के मामले में शिकायत की है. सांसद खुद इस कॉलेज के अध्यक्ष हैं.
 

Ranchi: सांसद बीडी राम ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के VC दिनेश सिंह के खिलाफ राज्यपाल से फिर शिकायत की है. उन्होंने VC द्वारा A. K. Singh College के विज्ञान संकाय, गणित और दर्शनशास्त्र में नामांकन की अनुमति नहीं देने के मामले में शिकायत की है. सांसद खुद इस कॉलेज के अध्यक्ष हैं.


सांसद द्वारा राज्यपाल के लिखे गये शिकायती पत्र में VC की इस कार्रवाई को एके सिंह कॉलेज के साथ सौतेला व्यवहार करार दिया है. सांसद ने VC पर नियम विरूद्ध व मनमाने ढंग से काम करने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. उन्होंने वर्ष 2025 में VC द्वारा गलत तरीके से A. K. Singh College के शासी निकाय को भंग कर दिये जाने को बतौर उदाहरण पेश किया है. इस घटना की शिकायत करने के बाद राज्यपाल के आदेश के आलोक में अगस्त 2025 में कॉलेज के शासी निकाय को फिर से बहाल किया गया.


सांसद ने कुलपति पर अपनी शक्ति का दुरूपयोग करते A. K. Singh College के कामकाज में परेशानी पैदा करने का आरोप लगाया है. साथ ही यह भी कहा है कि राज्यपाल के आदेश के बाद कॉलेज के शासी निकाय ने जिसे प्रिंसिपल बनाया, कुलपति उसे मान्यता नहीं दे रहे हैं. संबद्ध कॉलेजों में नामांकन के लिए कुलपति ने दो बार बैठक की. लेकिन एके सिंह कॉलेज को बैठक की सूचना नहीं दी. इससे नौ जून 2026 को हुई बैठक में कॉलेज की ओर से कोई शामिल नहीं हो सका. दूसरे कॉलेजों से सूचना मिलने के बाद 12 जून को हुई बैठक में एके सिंह कॉलेज के प्रिंसिपल शामिल हुए.


बैठक में Dean Of  Students Welfare द्वारा मांगे गये सारे दस्तावेज उपलब्ध कराये गये. इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर के कॉलेजों में नामांकन से संबंधित आदेश जारी किया गया. लेकिन एके सिंह कॉलेज में विज्ञान संकाय, गणित और दर्शनशास्त्र में नामांकन की अनुमति नहीं दी. अन्य कॉलेजों के मुकाबले कुलपति द्वारा एके सिंह कॉलेज को नामांकन की अनुमति नहीं देना कॉलेज के साथ किया गया सौतेला व्यवहार है. सांसद ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए नामांकन की अनुमति देने का अनुरोध किया है. उल्लेखनीय है कि कुलपति ने पिछले साल भी इस कॉलेज को नामांकन के मामले में परेशान किया था.

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