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विदेशों  में अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा, पुरी के गजपति महाराज नाराज, ISKCON को पत्र लिखा

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की पिछली आपत्तियों पर ISKCON ने तर्क दिया था कि हर देश में जलवायु परिस्थितियों, सरकारी नियमों और स्थानीय सांस्कृतिक कारक महत्वपूर्ण होते हैं, इस कारण शास्त्रों में दी गयी तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना हमेशा संभव नहीं  है.
 
पुरी की रथयात्रा

Puri : पुरी के गजपति महाराज और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष दिब्यसिंह देब ने इस्कॉन द्वारा गलत समय पर रथयात्राएं निकाले जाने पर नाराजगी जताई है. उनके अनुसार इस्कॉन शास्त्रों के नियमानुसार यात्रा का आयोजन नहीं कर रहा है.

 

गजपति महाराज ने इस संबंध में मायापुर में ISKCON की गवर्निंग बॉडी कमीशन के चेयरमैन मधुसेविता दास प्रभु को एक पत्र लिखा है, उसमें कहा है कि वे अक्टूबर 2025 में लिये गये फैसले पर फिर से विचार करें, जिसके तहत विदेशों में अलग-अलग समय पर रथ यात्राएं निकाली जा रही है.

 

साल 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा निकाली जाये.

 

 
जान लें कि एक दिन पूर्व नैरोबी(केन्या)में ISKCON ने रथयात्रा का आयोजन किया. पिछले माह 14 जून को न्यूयॉर्क सिटी में,  21 जून को लंदन में और 5 जुलाई को सिडनी में रथयात्रा निकाली गयी है.

 

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इस साल स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी. मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जायेगी.  हिंदू कैंलेंडर के अनुसार रथयात्रा हमेशा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर निकाली जाती है.  

 
 

एक खबर और है कि गजपति महाराज ने उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्राएं आयोजित करने की योजना पर नाखुशी जाहिर की है.  उन्होंने याद दिलाया है कि  धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथ यात्रा  आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है.

 
 

उन्होंने महर्षि वेदव्यास रचित स्कंद पुराण का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ ने स्वयं स्नान यात्रा और रथयात्रा की निर्धारित तिथि बताई हैं. ऐसे में मनमाने समय में आयोजन करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत जाना होगा.

 
 

जानकारी के अनुसार श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की पिछली आपत्तियों पर ISKCON ने तर्क दिया था कि हर देश में जलवायु परिस्थितियों, सरकारी नियमों और स्थानीय सांस्कृतिक कारक महत्वपूर्ण होते हैं, इस कारण शास्त्रों में दी गयी तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना हमेशा संभव नहीं  है.

 
  

 

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