- पलामू DSE हुए हाजिर
- कोर्ट ने जवाब पर जताई असंतुष्टि
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) कोर्ट में हाजिर हुए और जवाब दाखिल किया. कोर्ट ने उनके जवाब पर असंतुष्टि जताई और अगली सुनवाई 2 सितंबर को पलामू डीसी को सशरीर हाजिर रहने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने पलामू DSE से पूछा कि एकल पीठ के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया. एकल पीठ के आदेश के खिलाफ सरकार की अपील भी खारिज हो चुकी है, ऐसे में आदेश का पूर्ण रूपेण अनुपालन होना चाहिए था.
प्रार्थी को नौकरी की पुनर्बहाली का निर्णय आपने लिया और उन्हें पुनर्बहाल किया. फिर उनके पुनर्बहाली के पहले के वेतन सहित सारे लाभ भी दिए जाने चाहिए थे. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने पक्ष रखा.
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एकल पीठ के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रार्थी को पुनर्बहाली के पहले के सारे लाभ दिए जाएं. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट रूल 393 के तहत नोटिस के बाद मई 2026 में प्रार्थी को पुनर्बाहल कर लिया गया.
लेकिन जिस अवधि में अनुचित रूप से उन्हें नौकरी से हटाया गया था, उस अवधि का लाभ नहीं दिया गया. जबकि एकल पीठ ने इन्हें पुनर्बहाल करने और सभी प्राप्तियों का भुगतान करने का निर्देश दिया था. झारखंड हाईकोर्ट रूल 393 के नोटिस के बाद इन्हें पुनर्बहाल तो किया गया.
लेकिन एकल पीठ के आदेश का पूर्ण रूपेण अनुपालन नहीं किया गया. एकल पीठ द्वारा पुनर्बहाली के आदेश को सरकार ने अपील दायर कर चुनौती दी थी, वह भी खारिज हो चुकी है. ऐसे में प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप उन्हें सारे लाभ दिलाए जाए.
दरअसल, शिक्षक नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी. वे पलामू जिले के सरकारी मध्य विद्यालय, विश्रामपुर में पदस्थापित थे. सेवा के करीब 5 वर्ष बाद वे गभीर अवसाद (एक्यूट डिप्रेशन) से पीड़ित हो गए और इलाज के लिए अवकाश पर चले गए थे.
इसके बाद उन्होंने विभाग को अवकाश बढ़ाने के लिए आवेदन भी भेजा था. अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, नंदू राम वर्ष 2004 से लगातार अवकाश पर थे. लंबे इलाज के बाद जब उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किया गया, तब वे 19 जनवरी 2012 को स्कूल में योगदान देने पहुंचे.
लेकिन उन्हें ज्वाइन करने नहीं दिया गया था. और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला दिया था. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दाखिल की थी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर दी थी.
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