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Court News : अवैध वाहन नीलामी केस में HC ने कहा, सरकार समस्या के समाधान में देरी क्यों करती है?

झारखंड में खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार द्वारा एक माह का समय मांगे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई.
 
  • एक माह में समाधान लेकर आए सरकार, मुख्य सचिव भी इसे देखें
  • सरकार को इस मामले में सॉल्यूशन लेकर आना चाहिए था, लेकिन सरकार एक माह का समय मांग रही है
  • लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव से कहा- समस्या आपने पैदा की है, अब तक समाधान क्यों नहीं निकला
  • जब्ती के बाद जल्दबाजी में वाहन की नीलामी कर उसे तीसरे पक्ष को क्यों हस्तांतरित किया
  • अदालत आम लोगों की समस्याओं का निदान चाहती है, लेकिन सरकार समस्या को खत्म करने की बजाय उसमें देरी करती है

Ranchi : झारखंड में खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार द्वारा एक माह का समय मांगे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई.

 

अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सरकार को मामले का निराकरण (सॉल्यूशन) लेकर आना चाहिए था. कोर्ट ने सरकार को एक माह का समय देते हुए मुख्य सचिव को भी इस मामले को देखने को कहा है. अगली सुनवाई 17 जून को होगी.

 

लातेहार के तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव और डीसी संदीप कुमार हुए हाजिर

इससे पहले मामले में लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त  भोर सिंह यादव वर्चुअल रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि ट्रेनिंग की वजह से वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हो पाए. कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और उनसे मौखिक रूप से कहा कि आपके कारण जो समस्या पैदा हुई है, उसका सॉल्यूशन अब तक क्यों नहीं निकला?

 

अवैध खनन के परिवहन में पकड़े गए वाहन की जब्ती के बाद जल्दबाजी में उसकी नीलामी कर उसे तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया गया. जबकि इससे संबंधित मामले में रिवीजन याचिका लंबित है. प्रार्थी को मौका दिए बिना उनके वाहन की नीलामी इतनी जल्द क्यों कर दी गई?

 

सुनवाई के दौरान लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए. कोर्ट में सरकार के रवैया पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से यह भी कहा कि सरकार को इस मामले में सॉल्यूशन लेकर आना चाहिए था. लेकिन सरकार की ओर से एक माह का समय मांगा जा रहा है.

 

कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अदालत आम लोगों की समस्याओं का अविलंब समाधान चाहती है. लेकिन सरकार ऐसे मामलों में समस्या को खत्म  करने की बजाय उसमें देरी करती है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं  न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में मामले की हुई. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने पक्ष रखा. 

 

बता दें कि प्रार्थी का हाइवा गया जिले से चोरी हो गया था, जहां उन्होंने इसको लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी. बाद में वह हाइवा अवैध माइनिंग के परिवहन के दौरान बालूमाथ में पकड़ा गया था. लातेहार के तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव ने उस पकड़े गए हाइवा की जब्ती कर जल्दीबाजी में नीलामी की प्रक्रिया शुरू की और किसी तीसरे पक्ष को वाहन को काफी सस्ते मूल्य पर बेच दिया. 

 

 

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