Ranchi News: सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा नहीं देने पर रांची सिविल कोर्ट ने बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. शुक्रवार को कोर्ट की टीम ने निगम के डिपो में खड़ी एक बस को जब्त कर लिया. जब्त बस को सिविल कोर्ट परिसर में रखा गया है.
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यह मामला सड़क दुर्घटना में विभूति प्रसाद सिंह की मौत से जुड़ा है. उनकी पत्नी मुन्नी देवी और तीन बच्चों ने वर्ष 2023 में मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), रांची में याचिका दायर की थी. सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में न्यायाधिकरण ने BSRTC को मृतक के आश्रितों को 93,38,294 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. साथ ही 26 मई 2023 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया गया था.
मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर मृतक के परिजनों ने अदालत में निष्पादन याचिका दाखिल की. इसके बाद न्यायाधिकरण ने निगम की चार बसों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था. शुक्रवार को सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल और अधिवक्ता प्रदीप कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में टीम बस जब्त करने पहुंची. हालांकि, डिपो में चार में से केवल एक बस ही उपलब्ध मिली, जिसे जब्त कर लिया गया.
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
मुआवजा भुगतान के आदेश के खिलाफ BSRTC ने पहले MACT में एकपक्षीय अवार्ड वापस लेने के लिए आवेदन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया. इसके बाद निगम ने झारखंड हाईकोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल की. 17 अप्रैल 2026 को जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने समीक्षा याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि पूर्व के फैसले में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है और समीक्षा याचिका न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है.
अब ब्याज समेत करीब 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान होने के बाद ही जब्त बस को मुक्त किया जा सकेगा. मुआवजा नहीं मिलने के कारण मृतक के परिजन लंबे समय से अदालत के आदेश के बावजूद भुगतान का इंतजार कर रहे हैं.
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