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Court News: HIV ब्लड कांड पर HC ने कहा- पीड़ित बच्चों के परिजनों का सामाजिक बहिष्कार व बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो

चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित रूप से दूषित रक्त चढ़ाने के कारण HIV से संक्रमित हुए पांच मासूम बच्चों के लिए मुआवजा एवं जीवनभर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में कोर्ट के आदेश के आलोक में चाईबासा डीसी, चाईबासा एसपी एवं सिविल सर्जन हाईकोर्ट में वर्चुअली हाजिर हुए.
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  • चाईबासा डीसी, एसपी एवं सिविल सर्जन हुए हाजिर, DALSA सचिव भी कोर्ट से जुड़े
  • पीड़ित परिवार के सदस्य को घर के नजदीक नौकरी दें
  • HIV संक्रमित 5 बच्चों के लिए हाईकोर्ट में 1 करोड़  रुपए मुआवजे की मांग
  • जीवनभर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग

Ranchi: चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित रूप से दूषित रक्त चढ़ाने के कारण HIV से संक्रमित हुए पांच मासूम बच्चों के लिए मुआवजा एवं जीवनभर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में कोर्ट के आदेश के आलोक में चाईबासा डीसी, चाईबासा एसपी एवं सिविल सर्जन हाईकोर्ट में वर्चुअली हाजिर हुए. 

 

वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) सेक्रेटरी, चाईबासा भी कोर्ट से सुनवाई के दौरान वर्चुअली रूप से जुड़े. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार देखें कि पीड़ित बच्चों के परिजनों का सामाजिक बहिष्कार ना हो, इसमें डालसा चाईबासा पीड़ित बच्चों के परिवार को मदद करें. बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसका भी ध्यान राज्य सरकार द्वारा रखा जाए.

 

कोर्ट को बताया गया कि एक पीड़ित बच्चे के परिवार को उसके घर से निकाल दिया गया है जिससे उसकी पढ़ाई बाधित हो गई है. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित परिवार के परिजनों को उनके घर के नजदीक अनुबंध के आधार पर नौकरी मिले. महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित परिवार को लगातार एक फुड बैग देने की व्यवस्था सरकार ने की है. मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने पक्ष रखा. 

 
दरअसल, मामले में प्रार्थी दीपिका हेंब्रम एवं अन्य ने दायर रिट याचिका में प्रत्येक बच्चे को 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने के साथ-साथ जीवनभर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है. 

 

क्या है याचिका में

दायर याचिका के अनुसार, ये सभी 5 बच्चे (उम्र 5 से 7 वर्ष) पीड़ित हैं और उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. अक्टूबर 2025 में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान कथित लापरवाही के कारण ये बच्चे  से HIV संक्रमित हो गए.

 

पीड़ित बच्चे पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) परिवारों से आते हैं. इनका परिवार अत्यंत गरीब हैं और दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं. इन 5 बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा में सुरक्षित रक्त चढ़ाने, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART), नियमित CD4 और वायरल लोड जांच, पोषण सहायता और मनोसामाजिक काउंसलिंग की मांग शामिल है. साथ ही, प्रभावित परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने और एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने की भी मांग की गई है.

 

याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि एक बच्चे को जानबूझकर संक्रमित रक्त चढ़ाया गया. मामले में संबंधित बच्चे के माता-पिता HIV नेगेटिव पाए गए हैं, जिससे संदेह और गहरा हो गया है. एक बच्चे के मामले में आरोप है कि ब्लड बैंक की एक कर्मचारी ने व्यक्तिगत रंजिश में जानबूझकर संक्रमित खून चढ़ाया.
 

राज्य सरकार ने इस मामले में 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने और कुछ अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई की है, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इसे नाकाफी बताया है. उनका कहना है कि इस घटना ने न केवल बच्चों के जीवन को खतरे में डाला है, बल्कि परिवारों को सामाजिक भेदभाव और आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है. याचिका में राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है और इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया गया है.

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