राज्य सराकर द्वारा 12 कार्यलापक अभियंताओं (EE) को अधीक्षण अभियंता (SE) में दी गयी प्रोन्नति को चुनौती देने के लिए दो याचिकाएं दायर की गयी थी, जिसकी याचिका संख्या 349/2024 और याचिका संख्या 3508/2024 थी.
प्रदीप कुमार और राम बदन सिंह की ओर से याचिका संख्या 349/2024 दायर की गयी थी. इसमें कहा गया था कि वे कार्यपालक अभियंता के पद पर पहले प्रोन्नत हुए हैं. लेकिन इनके बाद कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रोन्नत किये गये इंजीनियरों को अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया है.
याचिकादाता अनुसूचित जाति (SC) से हैं. लेकिन उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति नहीं दी गयी है, इसलिए सरकार द्वारा अधीक्षण अभियंता के पद पर 6 अगस्त 2019, 21 अक्टूबर 2022 और 11 जनवरी 2024 को प्रोन्नति से संबंधित जारी अधिसूचना रद्द की जाए.
दूसरी याचिका 3508/2024 कार्यपालक अभियंता रामेश्वर साह, देवा सहाय भगत, दुखा मुंडा, सुनील कुमार और बाल किशोर किस्कू की ओर से दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि वे अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य हैं. उनके बाद कार्यपालक अभियंता में प्रोन्नत इंजीनियरों को अधीक्षण अभियंता में प्रोन्नत कर दिया गया है, इसलिए प्रोन्नति से संबंधित अधिसूचना रद्द की जाये.
दोनों ही याचिकाओं में विनय कुमार, देवाशीष लाहिड़ी, सत्येंद्र प्रसाद सिंह, अभिनेंद्र कुमार, लैफुल्लाह अंसारी, संतोष कुमार, कुंडल कुमार, जयकांत राम, सुनील कुमार रजक, विजय कुमार दास, कुमार कृष्णानंद दास और कान्हे प्रसाद को कार्यपालक अभियंता के पद पर दी गयी प्रोन्नति को चुनौती दी गयी थी.
हाईकोर्ट के डिविजन बेंच में दोनों याचिकाओं की साथ सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अधीक्षण अभियंता के रूप में प्रोन्नत अधिकारियों की ओर से यह तर्क किया गया कि उनकी नियुक्ति 1989 और 1995 में हुई थी. सरकार ने सहायक अभियंताओं की वरीयता सूची 5 मई 2015 में बनायी है. उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर इसी वरीयता सूची के आधार पर दी गयी है.
हाईकोर्ट के डिविजन बेंच ने अधीक्षण अभियंता के पद प्रोन्नति के लिए दिनांक 6 अगस्त 2019, 21 अक्टूबर 2022 और 11 जनवरी 2024 को जारी अधिसूचना रद्द करने से इनकार कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ताओं को अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नित के लिए अपने कोटे के तहत दावा करने का सुझाव दिया.
ऐसा करने से आरके संभरवाल बनाम पंजाब सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सिद्धांत का पालन होगा और कॉडर में 100 प्रतिशत आरक्षण से बचा जा सकेगा. साथ ही संवैधानिक प्रावधान के अनुपालन में अरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तक सीमित रह सकेगी.
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