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Court News : PMLA की धारा 50 के तहत बयान दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही- हाईकोर्ट

Ranchi : PMLA की धारा 50 के तहत बयान दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही (Judicial Proceeding) है. ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री अलमगीर आलम के डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज करने के दौरान हाईकोर्ट ने यह बात कही.

 

आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई के दौरान PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयान पर वैधानिक सवाल उठाया गया था. न्यायालय ने इस बिंदु पर उठाए गए सवालों पर सभी पक्षों की बात सुनने के बाद यह कहा कि आपराधिक गतिविधियों के सहारे उत्पन्न धन (Proceeds of Crime)  के मामले की जांच के दौरान PMLA की धारा 50 के तहत बयान दर्ज करने की कार्रवाई पुलिस नहीं करती है. इसलिए इस बयान पर विश्वास किया जाना चाहिए. PMLA के तहत समन भेजना और बयान दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही है.

 

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दायर किए गए Prosecution Report में इस बात का खुलासा किय गया है कि आलमगीर आलम मंत्री रहते हुए कथित तौर पर कमीशन वसूली में शामिल थे. विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडर में कमीशन की वसूली की जाती थी.

 

वीरेंद्र कुमार राम और संजीव लाल ने PMLA की धारा 50 के तहत दिए गए बयान में याचिकादाता के संलिप्त होने की बात कही गई है. इसके अलावा विभागीय इंजीनियरों ने टेंडर में कथित कमीशन वसूली के सिस्टम की जानकारी दी है. ईडी के आरोप पत्र में इस प्रक्रिया के सहारे 37.55 करोड़ रुपये की वसूली की बात कही गई है.

 

प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र में छापेमारी के दौरान डायरी और नोट बुक जब्त किए जाने का उल्लेख किया गया है. इसमें कमीशन की वसूली और बंटवारे का ब्योरा हाथ से लिखा हुआ है. इसमें लिखे गए कोड वर्ड से याचिकादाता की पहचान की गई है. इन कोर्ड वर्ड के साथ ही कमीशन में हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया गया है.

 

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद पीएमएलए कोर्ट द्वारा मामले में आरोप गठन की कार्यवाही को सही करार दिया और उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

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