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Court News : सेवानिवृत्त एवं कार्यरत तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हाईकोर्ट से राहत

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट से करमचंद भगत कॉलेज, बेड़ो के सेवानिवृत्त एवं कार्यरत तृतीय/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने राज्य सरकार के मेमो नंबर 869 दिनांक 11.06.2024  को रद्द कर दिया.
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  • राज्य सरकार के मेमो नंबर 869 दिनांक 11.06.2024 को कोर्ट ने किया रद्द  
  • याचिकाकर्ताओ को 5वें, 6वें एवं 7वें वेतन पुनरीक्षण का लाभ दें
  • पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्निर्धारण  करें
  • पूरी प्रक्रिया 10 सप्ताह के भीतर पूरी करने का दिया आदेश 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट से करमचंद भगत कॉलेज, बेड़ो के सेवानिवृत्त एवं कार्यरत तृतीय/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने राज्य सरकार के मेमो नंबर 869 दिनांक 11.06.2024  को रद्द कर दिया.

 

साथ ही सभी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया. राज्य सरकार एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 5वें, 6वें एवं 7वें वेतन पुनरीक्षण का लाभ दें. पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्निर्धारण करें. पूरी प्रक्रिया 10 सप्ताह के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है.

 

याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के मेमो नंबर 869 दिनांक 11.06.2024 को चुनौती दी थी, जिसके द्वारा उन्हें 5वें, 6वें और 7वें वेतन पुनरीक्षण का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था.

 

मामले में राज्य सरकार ने दावा किया था कि कॉलेज में केवल 87 स्वीकृत पद थे, जबकि 100 कर्मचारियों का समायोजन कर दिया गया था.
याचिकाकर्ताओं का मामला W.P.(S) No. 3260/2016 के याचिकाकर्ताओं जैसा नहीं था.

 

समायोजन के समय पद स्वीकृत नहीं थे और राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक थी. मामले में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 87 नहीं, कुल 118 स्वीकृत पद थे. कोर्ट ने यह भी कहा की कर्मचारियों का समायोजन विश्वविद्यालय का विशेष अधिकार है. संबद्ध (affiliated) कॉलेज के कर्मचारियों को constituent college में absorb करने का अधिकार विश्वविद्यालय को है. राज्य सरकार absorption की वैधता पर प्रश्न नहीं उठा सकती.

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि W.P.(S) No. 3260/2016 में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका था कि जिन कर्मचारियों का absorption हो चुका है, उन्हें Justice S.B. Sinha Commission के पास जाने की आवश्यकता नहीं थी. राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी की.

 

वहीं, कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने कई दशकों तक सेवा दी. अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
ऐसे में उन्हें 5वें, 6वें एवं 7वें वेतन पुनरीक्षण का लाभ न देना मनमाना और अन्यायपूर्ण है. मामले में विशू उरांव, एतवा उरांव, नारायण सिंह सहित कई याचिकाएं  दाखिल की गई थी.

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