- सरकार ने मेरिट लिस्ट में किया संशोधन, JTET परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेने वाले को सहायक आचार्य के मेरिट लिस्ट में आरक्षण का लाभ से किया वंचित
- प्रार्थियों ने कहा- TET परीक्षा में आरक्षण के छूट से नियुक्ति प्रक्रिया का नहीं है कोई संबंध
- विस्तृत सुनवाई 7 जुलाई को
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य के संशोधित रिजल्ट (अगस्त 2025) को चुनौती देने वाली आशा कुमारी एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने प्रार्थियों के लिए सीट सुरक्षित रखने का निर्देश जेएसएससी को दिया. कोर्ट ने महाधिवक्ता राजीव रंजन के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तिथि निर्धारित की है.
यहां उल्लेखनीय है कि प्रार्थियों का पूर्व में मेरिट लिस्ट में चयन हो चुका था, उनके नाम की अनुशंसा भी जेएसएससी ने सरकार से कर दी थी उनकी जिला स्तरीय काउंसलिंग भी हो चुकी थी. लेकिन इसी बीच सरकार ने मेरिट लिस्ट में संशोधन करने का निर्णय लिया था.
सरकार ने मेरिट लिस्ट के संशोधन में यह फैसला लिया कि उक्त परीक्षा में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी जिन्होंने JTET परीक्षा में आरक्षण का लाभ लिया है उन्हें दोबारा सहायक आचार्य के मेरिट लिस्ट में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.
जिससे कई अभ्यर्थी जो आरक्षित वर्ग के थे और अनारक्षित कोटा में उनका चयन हुआ था उन्हें वापस आरक्षित कोटा में लाया गया था. जिससे कई अभ्यर्थी जिनका चयन पूर्व में हुआ था उन्हें नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था.
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि JTET परीक्षा में आरक्षण के छूट से नियुक्ति प्रक्रिया का कोई संबंध नहीं है. सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली और इसके विज्ञापन में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है.
हाल ही में इसी तरह के शिक्षक नियुक्ति मामले में छाया वर्सेस स्टेट ऑफ महाराष्ट्र में यह फैसला दिया गया है कि TET में से लिए गए आरक्षण की छूट से अभ्यार्थियों की नियुक्ति का कोई संबंध नहीं है. TET केवल पात्रता परीक्षा है, यदि नियुक्ति नियमावली में इसका जिक्र नहीं है तो TET के आरक्षण के छूट का अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर असर नहीं पड़ना चाहिए.
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