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Court News : जाति प्रमाण पत्र कंसीडर नहीं करने के मामले में प्रार्थियों की अपील हाईकोर्ट से खारिज

जाति प्रमाण पत्र को कंसीडर नहीं करने के मामले डॉ नूतन इंदवर सहित 22 लोगों की याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में प्रार्थियों की अपील (LPA) खारिज कर दी है.
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  • JSSC/JPSC के विज्ञापन के शर्त के अनुरूप जाति प्रमाण पत्र जमा नहीं करने पर उम्मीदवारी रद्द की

Ranchi : जाति प्रमाण पत्र को कंसीडर नहीं करने के मामले डॉ नूतन इंदवर सहित 22 लोगों की याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में प्रार्थियों की अपील (LPA) खारिज कर दी है.

 

इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ तीन जजों की पूर्ण पीठ द्वारा तय किए गए तीन अहम बिंदुओं पर फैसले के बाद सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान जेएसएससी/जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पक्ष रखा. जबकि प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की.

 

दरअसल, यह विवाद जेएसएससी/जेपीएससी के उन विज्ञापनों से जुड़ा है, जिनमें अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि के भीतर तय प्रारूप में जाति प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया था.

 

कई अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ डेट के बाद प्रमाण पत्र जमा किया या निर्धारित फॉर्मेट का पालन नहीं किया, जिसके बाद आयोग ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. साथ ही उन्हें आरक्षित वर्ग से सामान्य वर्ग में शिफ्ट कर दिया गया था.

 

इसी फैसले को चुनौती देते हुए प्रार्थियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खंडपीठ ने खारिज कर दिया है.

 

कोर्ट ने अपने आदेश में डॉ. नूतन इंदवार समेत कई उम्मीदवारों के आरक्षण लाभ के दावे को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन संख्या 02/2016 की शर्तें स्पष्ट और अनिवार्य थीं. आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल वैध जाति प्रमाण-पत्र होना पर्याप्त नहीं था, बल्कि उसके विवरण को ऑनलाइन आवेदन पत्र में अंकित करना भी आवश्यक था.

 

कोर्ट ने यह भी माना कि यदि आवेदन पत्र में आवश्यक विवरण नहीं भरे गए हों, तो अभ्यर्थिता रद्द की जा सकती थी. केवल आवेदन स्वीकार कर परीक्षा में बैठने की अनुमति देना, आरक्षित श्रेणी का अधिकार प्रदान नहीं करता. गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर प्राप्त नियुक्ति शून्य (void) मानी जा सकती है.

 

अपीलकर्ताओं ने जाति प्रमाण-पत्र का आवश्यक विवरण ऑनलाइन आवेदन में नहीं भरा था, इसलिए उन्हें सामान्य वर्ग (General Category) में माना गया. सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से कम अंक होने के कारण उन्हें असफल घोषित किया गया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों की कार्रवाई में कोई अवैधता या मनमानी नहीं पाई गई.

 

 

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