- जिला शस्त्र अधिकारी को फिर से विचार करने का निर्देश
Lagatar Desk : सिर्फ जान पर खतरे का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होने के आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता. यह टिप्पणी पटना हाईकोर्ट ने एक ईंट-भट्ठा कारोबारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की है.
साथ ही अदालत ने मामले में जिला शस्त्र अधिकारी को लाइसेंस आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि कुछ व्यवसाय ऐसे होते हैं, जहां सुरक्षा के लिहाज से हथियार की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
जस्टिस अजित कुमार की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पटना प्रमंडलीय आयुक्त ने सत्येंद्र प्रसाद के हथियार लाइसेंस आवेदन को खारिज कर दिया था.
याचिकाकर्ता की दलील, आत्मरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस जरूरी
सत्येंद्र प्रसाद की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल धनरूआ इलाके में ईंट भट्ठा चलाते हैं और उनकी जान को खतरा है, इसलिए उन्हें आत्मरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस दिया जाना चाहिए.
वकील ने अदालत को बताया कि कुछ असामाजिक लोगों ने जबरन उनके ईंट-भट्ठे, जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर, मिट्टी मिक्सिंग मशीन और ऑफिस पर कब्जा कर लिया है. इस संबंध में थाने में शिकायत करने की कोशिश भी की गई, लेकिन शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं हुई.
हाईकोर्ट के दखल के बाद दर्ज हुई FIR
कोर्ट को बताया गया कि 2020 की घटना में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 2023 में प्राथमिकी दर्ज की गई. दबंगों के डर से सत्येंद्र प्रसाद अपना गांव छोड़कर परिवार के साथ पटना में रहने को मजबूर हैं.
इसके बावजूद जिला शस्त्र अधिकारी ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि जान को खतरा साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए हैं. बाद में प्रमंडलीय आयुक्त ने भी उसी फैसले को बरकरार रखा.
लाइसेंस देने के लिए हर बार जान पर हमले का सीधा सबूत जरूरी नहीं
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि आर्म्स एक्ट के तहत कुछ व्यवसाय ऐसे माने जाते हैं, जहां सुरक्षा के लिहाज से हथियार की जरूरत पड़ सकती है. इनमें ईंट-भट्ठा, पेट्रोल पंप, सोना-चांदी की दुकान और गैस एजेंसी जैसे कारोबार शामिल हैं.
ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि हथियार लाइसेंस देने के लिए हर बार जान पर हमले का सीधा सबूत जरूरी नहीं होता. अगर किसी व्यक्ति के पेशे या परिस्थिति को देखते हुए सुरक्षा का खतरा हो, तब भी लाइसेंस दिया जा सकता है.
सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जिला शस्त्र अधिकारी को आवेदन पर नए सिरे से विचार कर जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया.
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