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Court News :  HC का निर्देश, 12 जून तक नियुक्ति पत्र दें, वरना प्रतिवादियों पर आरोप गठित की जाएगी

  • शुक्रवार तक याचिकाकर्ताओ को अपॉइंटमेंट लेटर नहीं मिला तो प्रतिवादियों के खिलाफ आरोप गठित की जाएगी : HC
  • अवमानना मामले में हाईकोर्ट में हाजिर हुए स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने  मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर नियुक्ति मामले में नियुक्ति पत्र नहीं दिए जाने को लेकर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर कोर्ट में हाजिर हुए.

 

मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ताओं के नियुक्ति का मामला अभी कैबिनेट से अप्रूवल को लेकर लंबित है. सरकार की ओर से कोर्ट से समय की मांग की गई.

 

जिस पर कोर्ट ने कहा कि 2 साल पूर्व ही कोर्ट ने नियुक्ति पत्र देने संबंधी आदेश पारित किया था. लेकिन अब तक इसका अनुपालन नहीं हुआ है. कोर्ट में सरकार द्वारा समय मांगे जाने के आग्रह को खारिज करते हुए कहा कि शुक्रवार तक याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति पत्र दिया जाए, अन्यथा अवमानना के इस मामले में प्रतिवादियों के खिलाफ आरोप गठित की जाएगी.

 

अगली सुनवाई शुक्रवार (12 जून) को होगी. दरअसल, कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर , डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्ट (प्रतिवादी संख्या 2) को तलब किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद सरकार ने नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए. इस कारण अवमानना याचिकाएं दायर की गईं. 

 

मामले को लेकर ज्योति लाल महतो, मृणाल कुमार राय एवं अन्य की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई है. मृणाल कुमार राय की ओर से अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने पक्ष रखा. पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शो-कॉज (जवाब) दाखिल किया गया था, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया था.

 

कोर्ट ने याद दिलाया था कि 20 अप्रैल 2026 को आदेश दिया गया था कि यदि अदालत के आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी ( प्रतिवादी संख्या  2) के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाएगी और उन्हें नोटिस (Form-I) जारी किया गया था.

 

15 मई 2026 को कोर्ट ने और सख्त चेतावनी दी थी कि अगली तिथि तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो अंतिम आदेश पारित किया जाएगा.अवमाननाकर्ता अधिकारियों का वेतन रोका जा सकता है. नियुक्ति पत्र जारी नहीं होने पर इसका उल्लेख उनकी सेवा पुस्तिका में किया जा सकता है.

 

इसके बावजूद भी अब तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ. कोर्ट ने विशेष रूप से नोट किया था कि प्रतिवादी संख्या  2 के खिलाफ पहले ही Form-I जारी हो चुका था. इसके बावजूद संबंधित अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए थे.

 

 

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