Zero FIR दर्ज करने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को BNSS, 2023 की धारा 173 के अनुसार Zero FIR दर्ज कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. साथ ही लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा है. हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्देश दिया है.
अदालत ने वमहिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को राज्य के सभी वन स्टॉप सेंटरों की कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इन केंद्रों की निगरानी के लिए महिलाओं की अध्यक्षता में समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है. साथ ही सेवा में लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.
यौन हिंसा पीड़िताओं के लिए आश्रय और पुनर्वास
हाईकोर्ट ने रांची स्थित नारी निकेतन (शक्ति सदन) को यौन हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए भी आश्रय गृह के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यहां रहने की कोई अधिकतम समय सीमा नहीं होगी और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा.
साथ ही राज्य सरकार को सभी आश्रय गृहों और पुनर्वास केंद्रों की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का आदेश दिया गया है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं तक इन सुविधाओं की जानकारी पहुंच सके.
रेप पीड़िता के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की
अदालत ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो बलात्कार से जन्मे बच्चों की शिक्षा और कल्याण की निगरानी करेगा. ऐसे बच्चों को कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.
इसके अलावा यदि कोई मेधावी छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) या भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित होता है तो उसे छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी.
त्वरित निपटारा, मुआवजा व्यवस्था, निगरानी, जांच को लेकर निर्देश
- - हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को मुकदमे के शुरुआती चरण में ही अंतरिम राहत की आवश्यकता पर विचार करना होगा.
- - अंतिम निर्णय के समय चाहे आरोपी दोषी ठहराया जाए, बरी हो जाए या फरार हो, पीड़िता के लिए अंतिम मुआवजा निर्धारित करना अनिवार्य होगा.
- - अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवजे का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए.
- - यौन अपराध मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर BNSS की धारा 346 के अनुसार समयसीमा का कड़ाई से पालन किया जाए.
- - अदालतों को अनावश्यक स्थगन (Adjournment) देने से बचने को कहा गया है, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके.
- - DGP को एक विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित करने का निर्देश दिया है, जो प्रत्येक तिमाही में यौन अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा और निगरानी करेगी, ताकि जांच और सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो.
- - मीडिया, पुलिस और न्यायालय कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय Nipun Saxena v. Union of India Judgment का पालन करना होगा.
- - पीड़िता की पहचान उजागर करने या गोपनीयता भंग करने वालों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
- - बलात्कार मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों के भीतर पूरी की जाए.
- - जबकि अंतिम जांच अधिकतम दो महीने के भीतर समाप्त कर ली जाए.
- - सभी जिलों के एसपी पीड़ितों को प्रशिक्षित वकीलों के माध्यम से तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराए.
- - वहीं, POCSO अधिनियम से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर आश्रय, सुरक्षा और चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित की जाए.
- - यौन अपराध पीड़ितों का बयान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जाए.
- - राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में "टू फिंगर टेस्ट" पर पूर्ण प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी करने का आदेश दिया गया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध का उल्लंघन पेशेवर कदाचार माना जाएगा.
- - दूरदराज क्षेत्रों की लड़कियों के लिए कानूनी जागरूकता अभियान चलाए जाएं.
- - इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में निशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं.
- - यदि सामाजिक परिस्थितियों के कारण पीड़िता और उसका परिवार स्थान परिवर्तन करना चाहता है, तो राज्य सरकार को उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करनी होगी.
- - राज्य सरकार को महिला हेल्पलाइन 181 को प्राथमिक हेल्पलाइन बनाने और उसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें
Leave a Comment