- झारखंड सरकार और जेएसएससी से मांगा जवाब
Ranchi: सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहायक आचार्य नियुक्ति से जुड़े परिमल कुमार और अन्य के मामले में 30 जनवरी 2025 को पारित आदेश से संबंधित मामले में दायर कई अवमानना याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रार्थियों का पक्ष सुना. कुछ मामलों में कोर्ट ने राज्य सरकार और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (जेएसएससी ) से जवाब मांगा है. अगली सुनवाई जुलाई माह में होगी.
मामले में कुछ प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पक्ष रखा. उनकी ओर से बताया गया कि आरक्षित कोटि के कई अभ्यर्थी जिन्होंने जनरल कोटि के निर्धारित कट ऑफ मार्स से ज्यादा अंक पाया था, उन्हें जनरल कोटि में ना रख कर उन्हें अपनी कोटि में रख दिया गया, जो नियमावाली के विरुद्ध है.
मामले में कोर्ट ने झारखंड सरकार और जेएसएससी से जवाब मांगा है. वहीं कई अभ्यार्थियों की ओर वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने पक्ष रखा. उनकी ओर से कहा गया कि जेएसएससी ने विज्ञापन में सहायक आचार्य नियुक्ति के लिए निर्धारित पद के विरुद्ध पूरा रिजल्ट जारी नहीं किया है. कई अभ्यर्थी जो दस्तावेज सत्यापन में सफल हो गए थे, उनका रिजल्ट बचे हुए सीट पर जारी नहीं किया जा रहा है. जो अभ्यर्थी अपने कोटि में क्वालीफाइंग मार्क्स से ज्यादा अंक लाए हैं और दस्तावेज वेरिफिकेशन में भी वे बुलाए गए थे, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ. यदि उनके कोटि में सीटें बची है, तो उनका रिजल्ट जल्द जारी कर उन्हें नियुक्त किया जाए.
वहीं मामले में हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में पारा शिक्षक कोटि के अभ्यर्थियों को गैर पारा शिक्षक कोटि में चयनित किया गया, जो नियमावाली के विरुद्ध है. सहायक आचार्य नियुक्ति में पारा शिक्षक कोटि की काफी सीटें खाली रह गई, क्योंकि उनका चयन गैर पारा कोटि में कर दिया गया. ऐसे में गैर पारा कोटि के अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ये सीटें पारा शिक्षक कोटि के सफल अभ्यर्थियों से भर दी गई है. मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार और जेएसएससी से जवाब मांगा है.
यहां बता दें कि सहायक आचार्य नियुक्ति में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ झारखंड टेट (जेटेट) पास अभ्यार्थियों परिमल कुमार और अन्य की ओर से दायर एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में 30 जनवरी 2025 को फैसला सुनाया था. उक्त नियुक्ति परीक्षा में सीटेट पास और झारखंड के पड़ोसी राज्य से टेट परीक्षा पास झारखंड निवासी अभ्यर्थी को शामिल करने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. इसके बाद सहायक आचार्य नियुक्ति में सीटेट पास अभ्यर्थी शामिल नहीं किए गए. साथ ही झारखंड के पड़ोसी राज्य से टेट परीक्षा पास झारखंड निवासी अभ्यर्थी को भी इस नियुक्ति में शामिल नहीं किया गया था.
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