- लंबित मामले 47397 और प्री-लिटिगेशन के 832365 वादों का किया गया निष्पादन
Ranchi : शनिवार को दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन झारखंड हाईकोर्ट के न्यायामूर्ति सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार सुजीत नारायण प्रसाद ने किया. उन्होंने रांची न्यायमंडल से इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया. आज रांची सिविल कोर्ट में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित मामले 47397 और प्री-लिटिगेशन के 832365 वादों का निस्तारण किया गया.
साथ ही 1,36,99,52,446.21 राशि का सेटलमेंट हुआ. गीता सिंह को मोटर वाहन दुर्घटना में मिलने वाली मुआवजा के तौर 13218496 रूपये के चेक का वितरण किया गया. इसके साथ ही वाहन दुर्घटना मुआवजा में न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा 36 पीड़ितों के बीच 200640672 राशि के चेकों का वितरण किया गया.
मौके पर न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि लोक अदालत के बारे में अधिवक्ताओं को भी जागरूकता के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहिए, लोग जागरूक होंगे, तो अधिक से अधिक वादों का निस्तारण होगा और लोगों को निःशुल्क और शीघ्र न्याय मिलेगा.
लोक अदालत एक मंच है, जहां वादों का निस्तारण एक ही मंच पर किया जाता है, इससे वादकारियों को धन व समय की बचत होती है और न्यायालय में लंबित मामले भी कम होते है. उन्होंने यह भी कहा कि न्याय प्रणाली में पीएलवी रीढ़ की हड्डी है. लोक अदालत वादकारियों के लिए सुलभ व निःशुल्क न्याय पाने का माध्यम है.
इस अवसर पर न्याययुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1, झालसा सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, डिप्टी सेक्रेटरी झालसा, अभिषेक कुमार, डालसा सचिव राकेश रोशन, उपायुक्त रांची, मंजुनाथ भजंत्री, रांची एसपी राकेश रंजन, रूरल एसपी ग्रामीण गौरव गोस्वमी, प्रधान सचिव विधि विभाग निरज कुमार श्रीवास्तव, निदेशक जुडिशियल एकेडेमी राजेश शरण सिंह, रांची जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शम्भू प्रसाद अग्रवाल, महासचिव संजय कुमार विद्रोही आदि उपस्थित थे.
कार्यक्रम में जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायायुक्त के हाथों से आज व्यवहार न्यायालय, रांची में दीदी कैफे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण, वलनेरेबल विटनेस डिपोजिशीन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेस रूम और क्यू.आर. कोड जेनेरेटेड एप्लिकेशन सिस्टम का उदघाटन भी किया गया.
यह बता दें कि रांची सिविल कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक दण्डाधिकारियों के लिए 40 बेंच एवं कार्यपालक दण्डाधिकारियों के लिए 20 बेंच का गठन किया गया था.
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