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रांची में भाकपा माले की जनसुनवाई, केंद्र सरकार की नीति पर उठे सवाल, मनरेगा कमजोर करने के लगे आरोप

Ranchi: राजधानी रांची में भाकपा माले के जनसुनवाई कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एक विस्तृत आरोप-पत्र पेश किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, मजदूर, किसान और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन विनोद कुमार सिंह ने किया, जबकि आरोप-पत्र आर.डी. मांझी ने प्रस्तुत किया.

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जनसुनवाई में महंगाई, बेरोजगारी, मजदूरी संकट और मनरेगा को कमजोर करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. आरोप-पत्र में कहा गया कि मनरेगा में पहले केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 थी, जिसे घटाकर 60:40 कर दिया गया है. साथ ही काम के घंटे बढ़ाने, मजदूरी पर दबाव और हड़ताल के अधिकार को सीमित करने जैसे आरोप भी लगाए गए. वक्ताओं ने कहा कि इन नीतियों का सबसे ज्यादा असर गरीबों, मजदूरों, किसानों और हाशिये के तबकों पर पड़ रहा है.

 

आरोप-पत्र में केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने और आम जनता के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया गया. वहीं झारखंड सरकार पर जमीन अधिग्रहण, संसाधनों के निजीकरण और आदिवासी समुदायों की अनदेखी का आरोप लगाया गया. 


अपने संबोधन में दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा, “मनरेगा देश के गरीबों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि जीवनरेखा है. इसे कमजोर करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है. सरकार रोजगार बढ़ाने के बजाय सीमित कर रही है, जो चिंताजनक है. यह सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों का भी सवाल है.” उन्होंने देशभर में जनआंदोलन खड़ा करने की बात कही.

 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वैश्विक घटनाओं और देश के अंदर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सरकार का रुख सवालों के घेरे में है. साथ ही उन्होंने यूजीसी समता विनियम को लागू कराने की लड़ाई में झारखंड के युवाओं से जुड़ने की अपील की.

 

जनसुनवाई में भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, जयंती चौधरी, सिराज दत्ता, दयामणि बारला सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. न्यायिक मंच में जनार्दन प्रसाद, सुषमा मेहता, अलमा खलखो और उस्मान अंसारी शामिल रहे. मंच के सदस्यों ने कहा कि जनसुनवाई में उठाए गए मुद्दे बेहद गंभीर हैं और इन पर ठोस कार्रवाई के साथ आगे भी संघर्ष जारी रखा जाएगा.

 

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