Ranchi News : जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है. गड़बड़ियों की जांच सीआईडी कर रही है. सीआईडी ने अब तक जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी करने, कराने और लाभ लेकर नौकरी पाने वाले कुल 58 से अधिक लोगों को गिरफ्तारी किया है.
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इसी बीच खबर है कि छात्र आंदोलन के नाम पर कथित तौर पर क्राउड फंडिंग के जरिये बड़े पैमाने पैसा जमा किया गया, इसकी जांच शुरू कर दी गई है. सूत्रों के अनुसार, स्पेशल ब्रांच की एक रिपोर्ट और जांच एजेंसी को मिली शिकायत के आधार पर जांच शुरू की जा रही है.
जांच इस बात की हो रही है कि कहीं इस फंडिंग का इस्तेमाल निजी या राज्य में अशांति फैलाने व सरकार को बदनाम करने के लिए तो नहीं हुआ.
2024-25 में एक करोड़ की क्राउड फंडिंग
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में जेएसएससी-सीजीएल मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान चंदे और आर्थिक सहयोग के लिए क्राउड फंडिंग से पैसे वसूले गए थे. सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम किन लोगों ने दिया और किस-किस के खाते में जमा हुई और बाद में उसका इस्तेमाल कहां किया गया?
जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि आंदोलन के नाम पर इतनी बड़ी रकम जुटाने की जरूरत क्यों पड़ी और इस राशि को किन-किन गतिविधियों में खर्च किया गया. रकम के स्रोत से लेकर उसके इस्तेमाल तक पूरे वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है.
धमकी और आपत्तिजनक संदेशों की भी जांच
आंदोलन के दौरान कुछ लोगों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दिए जाने और उनके परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक एवं धमकी भरे संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए. जांच के दौरान धमकी देने वालों की पहचान, धमकी के पीछे की वजह, फंडिंग के स्रोत और आंदोलन से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल जांच का हिस्सा हो सकती है.
2026 में 85 लाख से अधिक जुटाने का दावा
वर्ष 2026 में जेएसएससी और जेपीएससी से जुड़े मामलों तथा परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई दिनों तक धरना दिया था. इसी दौरान आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग की अपील करते हुए अलग-अलग QR कोड जारी किए जाने की बात सामने आई है. कुल 85 लाख रुपये जुटाये गये. सीआइडी को मिली शिकायत में मनीष कुमार और बृजभूषण किशोर अग्रवाल समेत अन्य लोगों से जुड़े QR कोड का उल्लेख किया जा रहा है.
साथ ही क्रउड फंडिंग के लिए अलग-अलग QR कोड जारी किए जाने की शिकायत भी की गई है. शिकायत पत्र में अमित कुमार के नाम से बैंक ऑफ बड़ौदा का खाता बताया गया है, जबकि मनीष कुमार के नाम से भी QR कोड जारी किए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा बृजमोहन प्रसाद अग्रवाल के नाम से भी QR कोड जारी होने का दावा किया जा रहा है.
संगठन के बदले व्यक्तिगत खातों में रकम आए
जांच इस बात की भी की जा रही है कि आंदोलन के नाम पर जुटाई गई पूरी राशि किसी छात्र संगठन के आधिकारिक खाते में जमा नहीं हुई, बल्कि कुछ रकम व्यक्तिगत बैंक खातों में पहुंची. जांच एजेंसी संबंधित व्यक्ति के बैंक खातों और उनसे जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है. QR कोड के जरिए जुटाई गई रकम का पूरा वित्तीय ट्रेल तैयार किया जा रहा है, ताकि पता चल सके कि पैसा किस स्रोत से आया और आगे किन खातों में गया.
संगठनों में मतभेद के बाद मिली शिकायत
हाल के दिनों में छात्र संगठनों के बीच मतभेद सामने आने के बाद कुछ संगठनों की ओर से कथित तौर पर पुलिस मुख्यालय और सीआईडी को गोपनीय जानकारी दिए गए हैं. इस वजह से ही जांच शुरु की गई है.
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