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तलाक के लिए क्रूरता “गंभीर और वजनदार” होनी चाहिए, न कि वैवाहिक जीवन की सामान्य उठापटक : HC

  • फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार
  • पति पर क्रूरता का आरोप वाली तलाक याचिका खारिज

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने पत्नी के खिलाफ क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग को खारिज करने वाले फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है. अदालत ने पति द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि वह पत्नी के खिलाफ क्रूरता का आरोप साबित करने में असफल रहा. कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में सामान्य मतभेद और रोजमर्रा के विवाद को क्रूरता नहीं माना जा सकता है.

 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तलाक के लिए क्रूरता “गंभीर और वजनदार” होनी चाहिए, न कि वैवाहिक जीवन की सामान्य उठापटक. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. मामला रांची फैमिली कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें 10 जून 2024 को पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी.

 

 

 

क्या है मामला

अपीलकर्ता पति राजीव कुमार (बदला हुआ नाम) ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत पत्नी दीया सिन्हा (बदला हुआ नाम) पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी. पति का कहना था कि विवाह के बाद पत्नी का व्यवहार उसके और उसके परिवार के प्रति ठीक नहीं था और वह अक्सर झगड़ा करती थी. 

 

वहीं पत्नी ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसे ही दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. उसने यह भी कहा कि वह वैवाहिक जीवन जारी रखना चाहती है.

 

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करते हुए पाया कि पति के आरोपों में विरोधाभास हैं और प्रस्तुत गवाह भी क्रूरता के ठोस प्रमाण नहीं दे सके. हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले में किसी भी तरह की त्रुटि या पक्षपात नहीं पाया और अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही सभी लंबित अंतरिम आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए. 

 

 

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