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सीयूजे में ‘भारत-केंद्रित विमर्श’ पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

Ranchi: सीयूजे में प्राध्यापकों के बीच विचार-चर्चा कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह संयोजक विनय दीक्षित ने भारत-केंद्रित विमर्श को अकादमिक जगत में सशक्त रूप से स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को वैचारिक दिशा देने की भी है.

 

अपने व्याख्यान में विनय दीक्षित ने “नैरेटिव” की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट करते हुए कहा कि नैरेटिव केवल घटनाओं का साधारण वर्णन नहीं होता, बल्कि यह समाज के चिंतन, दृष्टिकोण और भविष्य की दिशा को प्रभावित करने वाला माध्यम है. उन्होंने कहा कि पूर्व में कई अवसरों पर भ्रामक और पक्षपाती नैरेटिव के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक और बौद्धिक मानस को प्रभावित करने के प्रयास हुए हैं. ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.

 

उन्होंने कहा कि मीडिया, शिक्षा जगत और इतिहासकार नैरेटिव निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं. यदि विश्वविद्यालय तथ्यपरक दृष्टिकोण, भारतीय परंपराओं और ज्ञान-परंपरा के आधार पर विमर्श को आगे बढ़ाएं, तो समाज में सकारात्मक और दीर्घकालिक परिवर्तन संभव है. उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर समसामयिक मुद्दों पर विचार निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं.

 

इतिहास के संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने बौद्धिक आधार को सुदृढ़ नहीं करता, तो बाहरी प्रभाव उसकी दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए सजग, सृजनशील और आत्मविश्वास से परिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है.

 

कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकों ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर प्रश्न उठाए, जिनका विनय दीक्षित ने तार्किक और तथ्यपूर्ण उत्तर दिया. उन्होंने विश्वविद्यालय में नियमित मासिक विचार गोष्ठियों के आयोजन का सुझाव भी दिया, ताकि स्वस्थ एवं सकारात्मक विमर्श की परंपरा विकसित हो सके.

 

इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र संयोजक (बिहार-झारखंड) देवव्रत प्रसाद और प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत उपाध्यक्ष व डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य राजकुमार शर्मा उपस्थित थे. कार्यक्रम में सीयूजे के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मनोज कुमार, प्रो. आर. के. डे, प्रो. देवव्रत सिंह, प्रो. डी. लाटा, प्रो. रत्नेश, डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. राजेश कुमार सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे.

 

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. मयंक रंजन ने अतिथियों और विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के बौद्धिक संवाद भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि शैक्षणिक वातावरण में रचनात्मक और राष्ट्रहितकारी विमर्श को बढ़ावा मिल सके.

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