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पत्नी के लिए पति का व्यवहार अन्यायपूर्ण हो, तो दांपत्य जीवन बिताने का आदेश नहीं दे सकते :  हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बोकारो फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए दांपत्य अधिकार बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के आदेश को रद्द कर दिया है.
 
  • पत्नी की अपील हाई कोर्ट से मंजूर
  • पति को नहीं मिला ‘दांपत्य अधिकार बहाली’ का आदेश

Ranchi :   झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बोकारो फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए दांपत्य अधिकार बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के आदेश को रद्द कर दिया है.

 

अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने पत्नी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर सही ढंग से विचार नहीं किया. हाईकोर्ट ने  पत्नी की अपील स्वीकार कर ली.

 

पत्नी की सुरक्षा व परिस्थितियों को देखना जरूरी  

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने पति पर गंभीर क्रूरता और हिंसा के आरोप लगाए हैं. पत्नी को जान का खतरा होने की भी आशंका है.

 

यदि पति का व्यवहार पत्नी के लिए असुरक्षित या अन्यायपूर्ण हो, तो दांपत्य अधिकार बहाली का आदेश नहीं दिया जा सकता. फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया.

 

ऐसे मामलों में अदालत को केवल पति के अधिकार नहीं, बल्कि पत्नी की सुरक्षा और परिस्थितियों को भी देखना चाहिए.
 

जानें क्या है मामला 

यह मामला नूरजहां (बदला हुआ नाम) और उसके पति मोहम्मद अकरम (बदला हुआ नाम) हक से जुड़ा है, जिसमें पति ने मुस्लिम कानून की धारा 281 के तहत पत्नी को वापस साथ रहने के लिए अदालत से आदेश मांगा था.

 

पति के अनुसार, उनकी शादी 25 नवंबर 2017 को मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी. कुछ समय बाद पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी और पति से अलग रहने का दबाव बनाती थी.

 

पति ने दावा किया कि पत्नी बिना किसी वैध कारण के ससुराल छोड़कर चली गई. वहीं पत्नी ने आरोप लगाया कि पति और उसके परिवार ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया, मारपीट की और जान से मारने की कोशिश की.

 

पत्नी ने महिला थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई थी. मामले में बोकारो फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए पत्नी को पति के साथ रहने का आदेश दे दिया था, जिसे पत्नी ने अपील दाखिल कर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

 

 

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