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CUJ के रजिस्ट्रार हाई कोर्ट में हुए हाजिर, माफी मांगी, प्रार्थी का पीएचडी में एडमिशन का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को कोर्ट के आदेश के आलोक में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) के रजिस्ट्रार हाजिर हुए. उन्होंने गलत शपथ पत्र पर कोर्ट से माफी मांगी, जिसे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश कुमार की कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.
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  • सीयूजे के गलत शपथ पत्र से कोर्ट को गुमराह करने का मामला

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को कोर्ट के आदेश के आलोक में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) के रजिस्ट्रार हाजिर हुए. उन्होंने गलत शपथ पत्र पर कोर्ट से माफी मांगी, जिसे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश कुमार की कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. 

 

लेकिन कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान में सीट खाली रखना नेचुरल रिसोर्सेज की बर्बादी है. इसका वे ख्याल रखें. कोर्ट ने रजिस्टर को 3 सप्ताह के अंदर प्रार्थी अमित कुमार चौबे का पीएचडी के इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में नामांकन करने का आदेश दिया.

 

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अफसर रजा ने पक्ष रखा. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट के कई आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया  कि एजुकेशनल संस्थान में सीटों को कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता है.

 

मेधावी छात्र के रहने पर शैक्षणिक संस्थानों में सीट रिक्त नहीं रखी जा सकती है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए याचिका निष्पादित कर दी. 

 

दरअसल यूनिवर्सिटी ने अपने 22 अगस्त 2025 के पूरक शपथ-पत्र में दावा किया था कि वर्ष 2023-24 सत्र में तीन ओबीसी सीटें खाली थीं, जो सामान्य  वर्ग के उम्मीदवार को नहीं दी जा सकती थीं. इन्हें अगले सत्र में कैरी फॉरवार्ड कर दिया गया. 

 

याचिकाकर्ता अमित कुमार चौबे ने इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में वर्ष 2023-24 सत्र के लिए पीएचडी सीटों पर प्रवेश नीति को चुनौती दी थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के शपथ-पत्र को 'झूठा' बताते हुए प्रथम दृष्टया कोर्ट को गुमराह करना माना था और रजिस्ट्रार को तलब किया था, जिसके आलोक में वे अदालत के सामने हाजिर हुए.

 

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