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झारखंड हाईकोर्ट ने अमन सिंह की नजरबंदी को सही ठहराया, याचिका खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत अमन सिंह उर्फ अमन शेखर की निवारक नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जेल प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का कोई प्रमाण नहीं है.
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  • पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा जारी नजरबंदी आदेश पूरी तरह कानून के अनुसार है
  • इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत अमन सिंह उर्फ अमन शेखर की निवारक नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जेल प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का कोई प्रमाण नहीं है.

 

आरोपी की गतिविधियां असामाजिक तत्व की परिभाषा में आती हैं. नजरबंदी आदेश में प्रशासन की संतुष्टि उचित और वैध है. पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा जारी नजरबंदी आदेश पूरी तरह कानून के अनुसार है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने नजरबंदी आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी. 

 

अमन सिंह पर हत्या के प्रयास, चोरी, रंगदारी, आर्म्स एक्ट सहित कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस रिपोर्ट में उसे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त और असामाजिक तत्व बताया गया था. उसकी नजरबंदी तीन-तीन महीने के लिए बढ़ाई गई थी. मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने  फैसला सुनाया.

 

दरअसल याचिकाकर्ता अमन सिंह को पूर्वी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी ने 14 मई 2025 को झारखंड कंट्रोल ऑफ क्राइम्स एक्ट, 2002 की धारा 12(1) एवं 12(2) के तहत तीन महीने के लिए हिरासत में रखने का आदेश दिया था.

 

इसके बाद 30 जुलाई 2025 और 30 अक्टूबर 2025 को नजरबंदी अवधि को आगे बढ़ाया गया. राज्य सरकार ने भी गृह विभाग के माध्यम से 8 जुलाई, 11 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को नजरबंदी की पुष्टि की थीय

 

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि नजरबंदी आदेश बिना नए अपराध के बार-बार बढ़ाया गया. जिला प्रशासन ने यांत्रिक तरीके से आदेश पारित किया. संविधान के अनुच्छेद 22(5) का उल्लंघन हुआ. उसे प्रभावी प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला.

 

वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि याचिकाकर्ता एक आदतन अपराधी है और जेल से बाहर आने पर सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है, इसलिए निवारक हिरासत आवश्यक थी. 

 

 

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