Ranchi : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ) के स्कूल ऑफ नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट (SNRM) द्वारा आयोजित सस्टेनेबल माइनिंग व इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी और एक्सपो में लगाई गई प्रदर्शनी प्रतिभागियों व विद्यार्थियों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यह तीन दिवसीय आयोजन 10 से 12 मई 2026 तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (IICM), कांके में आयोजित किया जा रहा है.

प्रदर्शनी में SNRM के चार प्रमुख विभाग -पर्यावरण विज्ञान, जियोइन्फॉर्मेटिक्स, भूविज्ञान एवं भूगोल - द्वारा किए जा रहे अत्याधुनिक शोध, तकनीकी नवाचार और शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया. इसका उद्देश्य सतत खनन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन से जुड़े वैज्ञानिक प्रयासों को समाज और विद्यार्थियों तक पहुंचाना है.
प्रदर्शनी में LiDAR और डेप्थ रेंज फाइंडर जैसे आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का विषय बना हुआ है. इन तकनीकों के माध्यम से आगंतुकों को भू-आकृतिक विश्लेषण, स्थलाकृतिक अध्ययन, पर्यावरणीय निगरानी तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की जानकारी दी जा रही है. विद्यालयी छात्रों ने इन तकनीकों में खास रुचि दिखाई और शोधकर्ताओं से तकनीकी जानकारी प्राप्त की.
SNRM के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. ए.सी. पांडेय, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. भास्कर सिंह, डॉ. बिकाश रंजन परिडा और डॉ. सी.एस. द्विवेदी प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के शोध एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों की जानकारी दे रहे हैं. संकाय सदस्यों ने बताया कि विश्वविद्यालय सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए खनन और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में बहुविषयी शोध को बढ़ावा दे रहा है.
प्रदर्शनी में पर्यावरण विज्ञान और भूगोल में इंटीग्रेटेड बीएससी, जियोइन्फॉर्मेटिक्स व भूविज्ञान में एमएससी तथा चारों विषयों में पीएचडी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है. विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया, शोध अवसरों और करियर संभावनाओं से अवगत कराया गया.
एक्सपो में झारखंड और ओडिशा के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभावों पर आधारित शोध परियोजनाएं भी प्रस्तुत की गईं. शोधकर्ताओं ने उपग्रह आधारित जियोस्पेशियल विश्लेषण, प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड सर्वेक्षण के माध्यम से वनस्पति क्षरण, धूल प्रदूषण और पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों का अध्ययन किया है.
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन डाटा और जियोस्पेशियल तकनीकों की मदद से खनन क्षेत्रों में हो रहे पर्यावरणीय परिवर्तनों की लगातार निगरानी की जा रही है. इन अध्ययनों का उद्देश्य ऐसी वैज्ञानिक रणनीतियां विकसित करना है, जिससे खनन से होने वाली पर्यावरणीय क्षति को कम कर प्रभावित क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बहाल किया जा सके.
विश्वविद्यालय का मानना है कि वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक के जरिए आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है. राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं एक्सपो में CUJ की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय सतत खनन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
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