Ranchi: धुर्वा थाना क्षेत्र के कुटे स्थित रेनबो फाउंडेशन इंडिया में एक सात साल की बच्ची के साथ बीते 28 अप्रैल को यौन हिंसा का मामला सामने आया था. इस मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो भी रांची आए थे। उनहोंने मामले को गंभीरता से लिया था. जानकारी के अनुसार वहां दो बच्चियां यौन हिंसा की शिकार हुई थी. जिसके बाद रांची CWC ने उन दोनों को प्रेमाश्रय शेल्टर होने में भेज दिया था. जिनमें एक बच्ची को 02 दिन के अंदर परिवार वालों को सौंप दिया गया था. जबकि एक बच्ची के माता-पिता की पुष्टि नहीं हो पा रही थी. बुधवार को एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद बच्ची के मां-बाप की पुष्टि हुई, जिसके बाद सीडब्ल्यूसी ने बच्ची को उसके परिवार वालों को सौंप दिया.
इसे भी पढ़ें- हाइकोर्ट">https://lagatar.in/high-court-reprimands-senior-ias-officer-avinash-kumar-know-why-he-had-to-appear-physically/">हाइकोर्ट
ने वरीय IAS अधिकारी अविनाश कुमार को लगाई फटकार, जानें क्यों सशरीर होना पड़ा हाजिर कई लोग बच्ची को लेने आए
सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन अजय शाह ने बताया कि बीते दो महीने में कई बार बच्ची के चाचा-मामा बनकर कई लोग बच्ची को ले जाने आए. पर जब तक बच्ची के माता-पिता की पुष्टि नहीं हुई. बच्ची को प्रेमाश्रेय शेल्टर होम में ही रखा गया था. उन्होंने बताया कि ऐसे और भी बच्चे हैं, जिनका रेस्क्यू किया जाता है. लेकिन जब तक बच्चे के माता-पिता की पुष्टि नहीं होती, तब तक बच्चे को सीडब्ल्यूसी की देखरेख में ही रखा जाता है.
इसे भी पढ़ें- क्लर्क">https://lagatar.in/the-journey-from-clerk-to-presidential-candidate-was-not-easy-draupadi-murmu-has-lost-her-husband-and-two-sons/">क्लर्क
से लेकर राष्ट्रपति उम्मीदवार तक का सफर नहीं था आसान, पति और दो बेटों को खो चुकी हैं द्रौपदी मुर्मू [wpse_comments_template]
Leave a Comment