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झारखंड के Private Healthcare का Dark Side: 22 लाख का इलाज, Hospital का Licence Suspend, Clinics पर कार्रवाई

Ranchi News: सबसे ताजा मामला रांची के Tulip Hospital का है. 12 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का Licence विस्तृत जांच पूरी होने तक Suspend कर दिया. मामला मरीज के परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार और भुगतान से जुड़े विवाद का है. विभाग ने अस्पताल में नए OPD Registration, नए IPD Admission और नई Elective Surgery पर रोक लगा दी है.
 
सिंबोलिक फोटो

Ranchi News: झारखंड में Private Healthcare को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई मामले सामने आए हैं. कहीं मरीज के इलाज और भारी बिल को लेकर विवाद हुआ, तो कहीं बिना Registration Clinic चलाने, नियमों का पालन नहीं करने और Ultrasound Centres में गड़बड़ी के आरोप लगे. इन मामलों में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने कई Hospitals, Clinics और Diagnostic Centres के खिलाफ कार्रवाई की है.

 

सबसे ताजा मामला रांची के Tulip Hospital का है. 12 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का Licence विस्तृत जांच पूरी होने तक Suspend कर दिया. मामला मरीज के परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार और भुगतान से जुड़े विवाद का है. विभाग ने अस्पताल में नए OPD Registration, नए IPD Admission और नई Elective Surgery पर रोक लगा दी है. हालांकि पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखने का निर्देश दिया गया है. जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे अस्पताल में सुरक्षित तरीके से Shift करने को कहा गया है.

 

अस्पताल को CCTV Footage, Patient Records, Case Sheets, Consent Forms, Test Reports, Duty Rosters और Electronic Records सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया है. अस्पताल के अनुसार Latehar से एक सड़क दुर्घटना में घायल मरीज 8 सितंबर को भर्ती हुआ था और उसकी Brain Surgery की गई थी. अस्पताल ने इलाज का कुल बिल करीब 1.70 लाख रुपये बताया है. पूरे मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा.

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Raj Hospital में 22 लाख के बिल पर विवाद

रांची के Raj Hospital में जुलाई 2026 में 18 वर्षीय Raju Kumar Ranjan की मौत के बाद विवाद हुआ था. मरीज सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ था. परिवार ने इलाज में लापरवाही और करीब 22 लाख रुपये के बिल का आरोप लगाया.

 

मामले में मुख्यमंत्री Hemant Soren के निर्देश पर जांच शुरू हुई और चार सदस्यीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया. हालांकि अस्पताल ने Medical Negligence के आरोपों से इनकार किया. अस्पताल के अनुसार मरीज के सिर, छाती, रीढ़ और पैर में गंभीर चोटें थीं. पैर में Crush Injury और Infection की स्थिति थी और Amputation की सलाह दी गई थी. अस्पताल ने इलाज का खर्च करीब 18 लाख रुपये बताया और कहा कि Insurance से काफी राशि कवर हुई थी. बकाया राशि करीब 2.4 लाख रुपये बताई गई. इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही माना जाएगा.

 

Ayushman योजना से HZB Ford and Ortho Care Suspend

हजारीबाग के HZB Ford and Ortho Care पर भी 2026 में कार्रवाई हुई. फरवरी में अस्पताल को Ayushman Bharat-Mukhyamantri Jan Arogya Yojana से Suspend किया गया. विभाग के अनुसार, National Insurance Company की Analysis Report में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं.

 

अस्पताल को पहले सितंबर 2024, मई 2025 और सितंबर 2025 में Show Cause Notice दिए गए थे. बाद में Reminder भी भेजे गए, लेकिन विभाग को संतोषजनक जवाब नहीं मिला. हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Ayushman Scheme से Suspension का मतलब अस्पताल का पूरा Clinical Licence रद्द होना नहीं है. यह सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत Empanelment से जुड़ी कार्रवाई है.

 

Palamu और Chatra में Nursing Homes पर कार्रवाई

जून 2026 में पलामू के Lesliganj में New Aashirwad Hospital and Nursing Home को नवजात की मौत के मामले के बाद Seal किया गया. C-section के बाद नवजात की मौत हुई थी. स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई. परिवार ने पैसे की मांग को लेकर भी आरोप लगाए, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने Pregnancy के Post-term होने की बात कही. अधिकारियों ने Records और Treatment Process की जांच शुरू की.

 

इसी तरह जून में Chatra में एक Private Nursing Home को गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के बाद Seal किया गया. जांच के दौरान अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी Staff मौजूद नहीं मिले. इसके बाद Ward, OPD और Operation Theatre समेत मुख्य हिस्सों को Seal किया गया और एक मरीज को Sadar Hospital Shift कराया गया.

 

Dental Clinic भी जांच के घेरे में

पलामू के Hariharganj में मार्च 2026 में Tooth Extraction के बाद एक महिला की मौत के मामले में एक Private Dental Clinic को Seal किया गया. स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मौत Excessive Bleeding और Shock से जुड़ी हो सकती है. Clinic को पहले भी Registration से जुड़े नियमों को लेकर कार्रवाई का सामना करना पड़ा था.

 

हालांकि इस मामले में सार्वजनिक रिपोर्टों में Clinic का Registered Name स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है. इसलिए बिना पुष्टि किसी नाम को जोड़ना सही नहीं होगा.

 

Ultrasound Centres पर भी बड़ी कार्रवाई

Private Healthcare की निगरानी सिर्फ Hospitals तक सीमित नहीं है. Ultrasound Centres भी PCPNDT Act के तहत जांच के दायरे में हैं.

 

2025-26 में पूरे झारखंड में 718 Ultrasound Centres का Inspection किया गया. इनमें 30 Centres के Licence Suspend किए गए. अकेले Bokaro में 17 Centres के Licence Suspend हुए. Dhanbad में 3, जबकि Deoghar, East Singhbhum, Godda और Hazaribagh में 2-2 Centres पर कार्रवाई हुई. Koderma और Simdega में भी एक-एक Centre का Licence Suspend किया गया.

 

2026-27 की पहली तिमाही में भी जांच जारी रही. अप्रैल से जून के बीच राज्य के 24 जिलों में 236 Ultrasound Centres का Inspection हुआ. Ranchi में सबसे ज्यादा 54 Inspections किए गए. इस दौरान Ranchi और Bokaro में एक-एक Centre का Licence Suspend हुआ, जबकि Giridih में एक Centre Seal किया गया.

 

Ranchi के Kantatoli में एक Unlicensed Ultrasound Centre पर भी कार्रवाई हुई. प्रशासन ने Centre को Seal करने के साथ Ultrasound Machine, Computer, Printer और दूसरे सामान जब्त किए. रिपोर्ट के अनुसार Centre का Licence करीब छह महीने पहले Expire हो चुका था.

 

Pandra में Sex Determination का मामला

रांची के Pandra इलाके में जून 2026 में Portable Ultrasound Machine से कथित Sex Determination का मामला सामने आया. कार्रवाई के दौरान एक Portable Ultrasound Machine जब्त की गई और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. इस मामले में Facility का नाम सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है.

 

Private Clinics की Monitoring पर सवाल

Jamshedpur के Potka में जुलाई 2026 में Health Department की टीम ने कई Private Clinics और Diagnostic Facilities की जांच की. Human Bandhu Clinic, Mansa Bhakt Clinic और Rajabala Clinic, Shankarda को Show Cause Notice जारी किया गया. जांच में Registration और जरूरी Documents से जुड़ी कमियां सामने आने की बात कही गई.

 

Giridih के Bengabad से मिले RTI Data ने भी Private Healthcare की Monitoring पर सवाल उठाए. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के साथ इलाके में केवल चार Private Clinics Registered थे. वहीं करीब एक दर्जन Clinics के बिना Registration चलने का दावा किया गया. कुछ जगह ICU, Plaster और Surgery जैसी सेवाएं देने के आरोप भी सामने आए. इन मामलों में विभागीय जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी.

 

High Court भी कर चुका है सख्त टिप्पणी

Private Hospitals और Clinics के Regulation को लेकर झारखंड High Court ने भी सरकार को Clinical Establishments Act, 2010 को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने बिना Registration चल रहे Clinical Establishments और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी.

 

Healthcare Facilities के Biomedical Waste को लेकर भी नियमों का पालन जरूरी है. अस्पतालों और Clinics को Biomedical Waste को सामान्य कचरे से अलग रखना और नियमों के अनुसार उसका Disposal करना होता है.

 

क्या है सबसे बड़ा सवाल

इन मामलों को देखें तो Private Healthcare में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ इलाज या बिल का नहीं, बल्कि Regulation और Monitoring का है. अस्पताल या Clinic चलाने के लिए Registration, Qualified Staff, Fire Safety, Biomedical Waste Management, Diagnostic Licence, PCPNDT Rules और Patient Records जैसे कई नियमों का पालन जरूरी है.

 

Tulip Hospital का Licence Suspension, Raj Hospital की जांच, Ayushman योजना से HZB Ford and Ortho Care का Suspension, Palamu और Chatra में कार्रवाई और Ultrasound Centres की जांच बताती है कि विभाग कार्रवाई कर रहा है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच नियमित रूप से हो रही है या शिकायत और घटना सामने आने के बाद ही कार्रवाई शुरू होती है.

 

मरीजों के लिए Private Healthcare उनकी सेहत के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा है. इसलिए इलाज, जांच, बिल, Consent और Discharge की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है. साथ ही किसी अस्पताल पर लगे आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम सच मानना भी सही नहीं होगा. ऐसे में जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे राज्य में Private Healthcare की नियमित और मजबूत Monitoring व्यवस्था की है.

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