Ranchi News: रांची विश्वविद्यालय में प्रशासनिक फैसलों को अधिसूचित और सार्वजनिक करने की प्रक्रिया भी शायद विश्वविद्यालय की परीक्षाओं की तरह है - कब होगी, कब नहीं. फैसला भले वर्षों पहले हो जाए, लेकिन उसे लागू करने के लिए कई कुलपतियों का कार्यकाल पार करना पड़ सकता है.
रांची विश्वविद्यालय की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन में वोकेशनल कोर्स के संविदा शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवा जारी रखने की अधिकतम आयु निर्धारित की गई है. खास बात यह है कि नोटिस में जिस निर्णय का हवाला दिया गया है, वह 9 अप्रैल 2024 को आयोजित CVS Core Committee की बैठक में लिया गया था. यानी निर्णय के करीब दो साल चार महीने बाद इसे औपचारिक रूप से प्रकाशित किया गया है.
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नोटिफिकेशन के अनुसार, वोकेशनल कोर्स और उसके अंतर्गत आने वाले घटक कॉलेज में कार्यरत संविदा शिक्षकों की सेवाएं 65 वर्ष की आयु के बाद जारी नहीं रहेंगी. वहीं संविदा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष निर्धारित की गई है. विश्वविद्यालय ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने और इसका सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है.
नोटिस में दर्ज 9 अप्रैल 2024 की तारीख उस समय की है, जब डॉ. अजित कुमार रांची विश्वविद्यालय के कुलपति थे. उनके कार्यकाल के बाद विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति के तौर पर दिनेश कुमार और फिर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद अब प्रो. सरोज शर्मा रांची विश्वविद्यालय की कुलपति हैं. ऐसे में सवाल है कि अप्रैल 2024 में लिया गया निर्णय आखिर अगस्त 2026 तक अधिसूचना के रूप में क्यों नहीं आ सका.
विश्वविद्यालय की ओर से जारी मौजूदा नोटिस में तत्काल प्रभाव से आदेश लागू करने की बात कही गई है, लेकिन निर्णय और उसके प्रकाशन के बीच करीब ढाई साल का अंतर प्रशासनिक प्रक्रिया की गति पर सवाल है.
रांची विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पदों पर बदलाव और उनसे जुड़े नोटिफिकेशन को लेकर भी इसी तरह के सवाल सामने हैं. IMS के निदेशक के बदलाव को लेकर 31 जुलाई 2026 को नोटिस जारी किया गया था. इसके करीब एक से दो सप्ताह बाद नए निदेशक ने अपना पदभार ग्रहण किया. इससे यह सवाल भी उठता है कि विश्वविद्यालय में किसी पद पर नियुक्ति या बदलाव और उसके औपचारिक प्रकाशन के बीच समय-सीमा को लेकर क्या कोई स्पष्ट व्यवस्था है.
वहीं, सूत्रों की मानें तो वोकेशनल के निदेशक भी बदल गए हैं, लेकिन इस संबंध में अभी तक आधिकारिक नोटिफिकेशन प्रकाशित नहीं किया गया है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. ऐसे में इस बदलाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने रांची विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निर्णयों को समय पर अधिसूचित करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं. खासकर तब, जब किसी निर्णय का सीधा असर कर्मचारियों की सेवा, पद और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर पड़ता हो.
अब सवाल यह है कि 9 अप्रैल 2024 को लिया गया फैसला 25 अगस्त 2026 तक लंबित क्यों रहा और इसे इतने लंबे अंतराल के बाद ही सार्वजनिक करने की जरूरत क्यों पड़ी? साथ ही निदेशकों और अन्य प्रशासनिक पदों में होने वाले बदलावों को लेकर नोटिफिकेशन जारी करने की प्रक्रिया में एकरूपता और समयबद्धता क्यों नहीं दिखाई देती?
फिलहाल वोकेशनल निदेशक के बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं कार्यकारिणी व्यवस्था की पारदर्शिता, समयबद्धता और निर्णयों के क्रियान्वयन पर जरूर सवाल खड़े करता है.
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