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हजारीबाग-चतरा में बौद्ध अध्ययन संस्थान खोलने की मांग, संजय मेहता ने केंद्र को भेजा प्रस्ताव

Ranchi/Hazaribagh : आजसू पार्टी के महासचिव संजय मेहता ने केंद्र सरकार से हजारीबाग और चतरा जिले में बौद्ध विरासत के संरक्षण और विकास के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज (CIBS) की स्थापना की मांग की है.

 

संजय मेहता ने अपने पत्र में बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा हजारीबाग में किए गए उत्खनन में करीब 900 वर्ष पुराने बौद्ध मठ के अवशेष मिले हैं. सदर प्रखंड के बहोरनपुर गांव (जुलजुल पहाड़ के पास) से भगवान बुद्ध और देवी तारा की 10 प्राचीन मूर्तियां मिली हैं. इससे पहले दिसंबर 2020 में यहां तीन कमरों वाला बौद्ध मंदिर भी मिला था.

 

उन्होंने कहा कि इन खोजों से स्पष्ट है कि 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच हजारीबाग क्षेत्र बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है. हजारीबाग के सेखा, गुरहेत, अमनारी, दैहर और मानगढ़ सहित कई गांवों में बौद्ध स्तूप, मूर्तियां और शिलालेख पाए गए हैं.

 

वहीं, चतरा जिले के इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पाल काल के बौद्ध अवशेष मिले हैं, जिनमें 1008 छोटी और 4 बड़ी बुद्ध प्रतिमाएं, 417 से अधिक मूर्तियां, वोटिव स्तूप और ब्राह्मी लिपि के शिलालेख शामिल हैं. पुरातत्वविदों के अनुसार यह क्षेत्र प्राचीन काल में बौद्ध तपोभूमि रहा है.


मेहता ने बताया कि हजारीबाग बोधगया से मात्र 124 किमी दूर है, जबकि इटखोरी 60-65 किमी की दूरी पर स्थित है. रांची एयरपोर्ट, हजारीबाग रेलवे स्टेशन और कोडरमा जंक्शन से अच्छी कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है, जिससे यह क्षेत्र संस्थान के लिए उपयुक्त बनता है.


संजय मेहता के अनुसार, संस्थान की स्थापना से-

बौद्ध अवशेषों का वैज्ञानिक संरक्षण और शोध होगा

स्थानीय युवाओं को पाली, संस्कृत, बौद्ध दर्शन में उच्च शिक्षा मिलेगी

बौद्ध सर्किट और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे


उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में CIBS केवल लेह (लद्दाख) में संचालित है, जबकि पूर्वी भारत में ऐसा कोई समर्पित संस्थान नहीं है. संजय मेहता ने संस्कृति, पर्यटन और शिक्षा मंत्रालय के साथ ASI के समन्वय से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने और विशेषज्ञ समिति गठित कर हजारीबाग या चतरा में संस्थान की स्थापना प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से झारखंड में बौद्ध विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन और शिक्षा को नई दिशा मिलेगी.

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