Ranchi News : झारखंड में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भ्रष्टाचार और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. छात्रों ने 11वीं से 13वीं JPSC और JSSC CGL परीक्षा रद्द करने, सीआईडी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा.
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छात्र प्रतिनिधियों का आरोप है कि झारखंड में पिछले 26 वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और सीटों की खरीद-बिक्री के कारण मेधावी अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. JSSC CGL परीक्षा में हजारीबाग के 1,400, बोकारो के 400 और नियामतपुर के 150 अभ्यर्थियों समेत अन्य स्थानों पर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर होटलों में ले जाकर उत्तर रटवाने के आरोप लगाए गए हैं. छात्रों का दावा है कि इस मामले में सीआईडी की जांच में भी कई अहम तथ्य सामने आए हैं.
अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है. उनके अनुसार, कॉपियों की जांच करने वाली TDPL एजेंसी में निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों को भी लगाया गया था. छात्रों ने सवाल उठाया कि एक शिक्षक से प्रतिदिन करीब 2,100 पन्ने यानी लगभग 50 कॉपियों की जांच कराना गुणवत्ता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने मुख्य परीक्षा के अंकों में कथित बदलाव और दूसरे विषयों के शिक्षकों से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
छात्रों ने सीआईडी की ओर से अदालत में सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पता चल सके.
उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाएं देखने की मांग के बावजूद उन्हें कॉपियां उपलब्ध नहीं कराई गईं.
पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए छात्र प्रतिनिधियों ने दोषियों को कम से कम 10 साल की सजा देने और उनकी संपत्ति जब्त करने की मांग की है. इसके अलावा, JPSC के तीन सदस्यों और JSSC के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने और मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग भी की गई है.
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से सुधारों के लिए दो महीने का समय मांगे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता से मुलाकात नहीं हो पाने पर भी नाराजगी जताई.
इसी के विरोध में अभ्यर्थियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से ‘न्याय एवं ध्यान आकर्षण यात्रा’ निकालने की घोषणा की है.
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और अदालत में मामले से जुड़े तथ्यों को मजबूती से नहीं रखा गया, तो राज्यव्यापी चक्का जाम किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जा सकता है.
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