Ranchi : अनुसूचित क्षेत्रों में घोषित नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 को रद्द किए जाने की मांग को लेकर कोल्हान आदिवासी समन्वय मंच ने राज्यपाल से हस्तक्षेप का आग्रह किया है. मंच के मुख्य संयोजक अर्जुन मुंदुईया ने इस संबंध में झारखंड के माननीय राज्यपाल को एक विस्तृत पत्र के जरिए मांग की है. मांग पत्र में कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका चुनाव कराना संविधान के प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है.
अपने पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जो नगर निकायों से संबंधित है. हालांकि संविधान के अनुच्छेद 243ZC में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह प्रावधान पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले अनुसूचित क्षेत्रों में स्वतः लागू नहीं होगा, जब तक संसद द्वारा कोई विशेष कानून (MESA) न बनाया जाए.
उन्होंने कहा कि पंचायतों के लिए जहां PESA कानून बना, वहीं नगरपालिकाओं के लिए अब तक PESA कानून अस्तित्व में नहीं है और न ही राज्यपाल द्वारा झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने की कोई वैध अधिसूचना जारी की गई है.
पत्र में यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZF के अनुसार 74वें संशोधन से पूर्व के नगरपालिका कानून अधिकतम एक वर्ष तक ही प्रभावी रह सकते थे, लेकिन उन्हें संविधान के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया, जिससे वे स्वतः अप्रभावी हो गए. ऐसे में अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका व्यवस्था लागू करना संविधान के अनुच्छेद 243ZC, 243ZF और 244(1) का उल्लंघन है.
मंच का आरोप है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय प्रणाली का जबरन विस्तार आदिवासी स्वशासन, ग्राम सभा की भूमिका और CNT/SPT जैसे संरक्षणात्मक कानूनों की भावना के विपरीत है.उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 27 जनवरी 2026 को जारी प्रेस नोट में जिन संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया है, वे सामान्य क्षेत्रों में लागू होते हैं, न कि अनुसूचित क्षेत्रों में.
इन सभी तथ्यों के आलोक में मंच ने राज्यपाल से नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 को अनुसूचित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है. साथ ही संविधान के अनुरूप आवश्यक वैधानिक व नीतिगत निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है. मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मुख्य निर्वाचन आयोग झारखंड तथा शहरी विकास एवं आवास विभाग के सचिव को भी भेजी गई है.
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