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देवघरः को-ऑपरेटिव ग्रेन बैंक की अरबों की संपत्ति का हिसाब नहीं, दुकानों से कमाई के रिकार्ड गायब

देवघर को-ऑपरेटिव ग्रेन बैंक खुद सवालों के घेरे में आ गया है. 129 वर्ष पुरानी इस सहकारी संस्था पर वित्तीय अनियमितता, संपत्ति प्रबंधन, पारदर्शिता व संस्थागत गिरावट के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
 
देवघर को-ऑपरेटिव ग्रेन बैंक का भवन.

Deoghar : समाज के कमजोर तबके को सहारा देने के उद्देश्य खोला गया देवघर को-ऑपरेटिव ग्रेन बैंक खुद सवालों के घेरे में आ गया है. 129 वर्ष पुरानी इस सहकारी संस्था पर वित्तीय अनियमितता, संपत्ति प्रबंधन, पारदर्शिता व संस्थागत गिरावट के गंभीर आरोप लग रहे हैं. 

चर्चा है कि संस्था की करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन और दुकानों का सही तरीके से न तो उपयोग हो रहा है और न ही उसका पारदर्शी लेखा जोखा सामने आ रहा है. देवघर में बैंक की कुल 32 शाखाएं (गोला) संचालित हैं. इनमें से 26 शाखाओं के पास अपनी जमीन और भवन है. इनमें से 12 शाखाओं का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है. 

 

 

देवघर में 30 से 40 दुकानें और रोहिणी क्षेत्र में 15 से 20 दुकानें किराए पर चल रही हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि इन संपत्तियों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपए है, जो इस संस्था की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है. 

 


सबसे बड़ा सवाल संस्था की आय के उपयोग को लेकर खड़ा हो रहा है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि दुकानों से हर महीने नियमित रूप से किराया वसूला जाता है, लेकिन यह राशि किस खाते में जमा होती है और किन मदों में खर्च की जाती है इसका कोई स्पष्ट और सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं है. वर्षों से आय व ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने के कारण पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.


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