मंत्री ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक
Deoghar : झारखंड सरकार ने देवघर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की तैयारी तेज कर दी है. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मेले को व्यवस्थित बनाने के लिए सोमवार को देवघर परिसदन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. अध्यक्षता झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने की. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा सर्वोपरि है.
बैठक में मेला क्षेत्र की आधारभूत संरचनाओं, सुरक्षा व्यवस्था व श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं पर मंथन किया गया. मंत्री ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, विद्युत आपूर्ति, आवासीय व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण व आपदा प्रबंधन सहित सभी बिंदुओं पर समीक्षा की गई.
मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है. लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो.
अधिकारियों ने जानकारी दी कि मेला से जुड़े अधिकांश कार्यों की प्रशासनिक व टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. लगभग 90 प्रतिशत योजनाओं पर कार्रवाई शुरू हो गई है और शेष प्रक्रियाओं को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है.
रेलवे, एनएचएआई व जिला प्रशासन की रणनीति
श्रावणी मेला के दौरान देवघर से बासुकीनाथ तक लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए इस बार अंतर-विभागीय समन्वय को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. जिला प्रशासन, NHAI व रेलवे के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया है. देवघर-बासुकीनाथ मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए आसनसोल रेल मंडल के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है.
अब स्थायी होगी मेले की व्यवस्था
इस बार की तैयारियों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मेला के दौरान हर वर्ष किए जाने वाले अस्थायी इंतजामों को स्थायी संरचनाओं में बदलने की योजना पर काम शुरू हो गया है. सरकार की मंशा है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर अस्थायी व्यवस्थाएं खड़ी करने के बजाय स्थायी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जाए, जिससे आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं को और अधिक बेहतर सुविधाएं मिल सकें. इससे न केवल प्रशासनिक दबाव कम होगा, बल्कि देवघर और बासुकीनाथ क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास भी सुनिश्चित होगा.
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