- कोर्ट ने आरोपों को नहीं माना सिद्ध
Deoghar : देवघर में साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए चर्चित रिखिया कांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुना दिया है. रजिस्ट्रार कोर्ट के न्याययिक दडांधिकारी प्रतीक रंजन ने सुनवाई के बाद सभी 20 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
कोर्ट से जिन आरोपियों को बरी किया है, उनमें शशांक शेखर भोक्ता, सुरेश पासवान, मुन्नम संजय, सुरेश शाह, बिनोद वर्मा, भूतनाथ यादव, देवनन्दन झा उर्फ नुनु झा, दीपक सिंह राजपूत, मणिकांत यादव, बेनी चौबे, रंजीत यादव, दिनेशानंद झा, आदित्य सरोलिया, कुणाल सिंह, राहुल सिंह, सुधीर दास, सुनील यादव, दिलीप यादव और राजेश यादव शामिल हैं.
संदेह के आधार पर लोगों ने की थी सड़क जाम
दरअसल यह मामला लोकसभा चुनाव 2019 के बाद उस समय सामने आया था, जब देवघर के बैद्यनाथपुर चौक के पास जिला प्रशासन द्वारा ईवीएम से भरे ट्रक को ले जाने के दौरान संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई थी.
ईवीएम लूटने का लगा था आरोप
दरअसल लोकसभा चुनाव 2019 के बाद देवघर प्रशासन द्वारा ईवीएम से भरा ट्रक ले जाया जा रहा था. इस दौरान बैद्यनाथपुर चौक के पास कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए सड़क जाम किया था.
सड़क जाम करने वालों पर ईवीएम लूटने और वाहन नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया था. हालांकि कोर्ट ने इन पर लगे आरोपों को सिद्ध नहीं माना और सभी को बरी कर दिया.
आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है : कोर्ट
सुनवाई के दौरान गवाह ने अदालत को बताया कि न तो किसी वाहन की लूट हुई थी और न ही कोई नुकसान पहुंचाया गया था. वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रीतम सिंह एवं राजेश कुमार शाही ने प्रभावी ढंग से अपनी दलीलें पेश की.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. इस फैसले के साथ शशांक शेखर भोक्ता, सुरेश पासवान सहित कुल 20 लोगों को राहत मिली है.
सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं : शशांक शेखर
चर्चित रिखिया कांड में देवघर कोर्ट का फैसला आने के बाद झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. आज न्यायालय ने इसे फिर साबित कर दिया.
सत्य की जीत हुई : सुरेश पासवान
वहीं देवघर विधायक सुरेश पासवान ने कहा कि मुकदमे के दौरान कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका और गवाह भी अपने बयानों पर कायम नहीं रह पाए. कहा कि शुरू से ही उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और आज सत्य की जीत हुई है.
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