नंदन पहाड़ के पास खतरों के बीच तैराकी सीखने को मजबूर बच्चे व युवा
जीतन कुमार
Deoghar : देवघर में खेलों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर कुमेटा स्टेडियम में अत्याधुनिक स्विमिंग पूल का निर्माण किया गया. इसका उद्देश्य था कि शहर के बच्चे व युवा सुरक्षित माहौल में तैराकी सीख सकें और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ें. लेकिन स्विमिंग पूल बनकर तैयार होने के बावजूद आज तक चालू नहीं हो पाया है. विभागीय सुस्ती व प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा देवघर के खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है.
देवघर में स्विमिंग की समस्या कोई नई नहीं है.यह एक ऐसी प्रमुख समस्या है, जो कई वर्षों से चली आ रही है. स्विमिंग पूल बंद रहने व शहर में तैराकी के लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों व युवाओं को मजबूरी में नंदन पहाड़ जैसे खतरनाक स्थानों की तलहटी में तैराकी सीखनी पड़ रही है. यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं. इसके बावजूद बच्चे व युवा जान जोखिम में डालकर तैराकी का अभ्यास कर रहे हैं.
नंदन पहाड़ में बच्चों को स्विमिंग सिखाने की शुरुआत समाजसेवी सुधाकर चौधरी ने की थी.उन्होंने बच्चों की रुचि और जरूरत को समझते हुए उन्हें तैराकी से जोड़ने का प्रयास किया. उनका उद्देश्य बच्चों को खेल की ओर प्रेरित करना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना था. लेकिन नंदन पहाड़ जैसे असुरक्षित स्थान पर तैराकी कराना खतरे से खाली नहीं है. गहराई, फिसलन और आपात स्थिति में त्वरित सहायता का अभाव बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा है. अभिभावकों व स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि जब कुमेटा स्टेडियम में स्विमिंग पूल मौजूद है, तो उसे चालू क्यों नहीं किया जा रहा है? आखिर क्यों बच्चे खुले और जोखिम भरे स्थानों पर तैराकी करने को मजबूर हैं?
कुमेटा स्टेडियम का स्विमिंग पूल चालू होने से देवघर में खेल संस्कृति को नई दिशा मिल सकती है. यहां योग्य प्रशिक्षकों की देखरेख में बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है, ताकि वे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो सकें. साथ ही इससे अभिभावकों की चिंता भी कम होगी और बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर ढंग से हो पाएगा. अब जरूरत है कि संबंधित विभाग व प्रशासन स्विमिंग पूल को आम उपयोग के लिए जल्द खोले.

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