Ranchi News: सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के उप सचिव राकेश कुमार के खिलाफ तीसरी बार विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश दिया है. नाबालिग लड़की के साथ मारपीट करने और आयरन से जलाने के आरोपों में उनके खिलाफ दो बार विभागीय कार्यवाही हुई थी. लेकिन दोनों बार उन्हें निर्देष करार दिया गया था. हाईकोर्ट भी उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कर चुकी है. तीसरी विभागीय कार्यवाही में IAS अधिकारी नेहा अरोड़ा को संचाल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है.
उल्लेखनीय है राकेश कुमार वर्ष 2019 में हजारीबाग जिले के बड़कागांव में प्रखंड पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे. उनके घर में एक नाबालिग आदिवासी लड़की काम करती थी. 200 रुपये की चोरी के आरोप में राकेश कुमार और उनकी पत्नी पर अपने घर में कार करने वाली लड़की के साथ मारपीट करने और आयरन से जलाने का आरोप लगा था. इस मामले में नाबालिग लड़की के पिता की ओर से हजारीबाग सदर थाना में प्राथमिकी (339/2019) दर्ज करायी गयी थी.
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2019 में हुई इस घटना के सिलसिले में सरकार ने राकेश कुमार के खिलाफ करीब छह साल बाद इस मामले में विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी. कार्मिक विभाग ने विभागीय कार्यवाही चलाने के लिए 6-8-2025 को आदेश जारी किया. संचालन पदाधिकारी ने तेज गति ने विभागीय कार्यवाही को निपटाया और 16-9-2025 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. इसमें संचलान पदाधिकारी ने राकेश कुमार को आरोप मुक्त कर दिया.
कार्मिक विभाग ने संचालन पदाधिकारी की रिपोर्ट की समीक्षा. इसमें यह पाया गया कि संचालन पदाधिकारी ने घटना से संबंधित गहावों के बयान और सबूत आदि का Examination और Cross Examination नहीं किया है. इस बात के मद्देनजर सरकार ने राकेश कुमार के खिलाफ दूसरी बार विभागीय कार्यवाही चलाने का फैसला किया. दूसरी बार संचालन पदाधिकारी को मामले से संबंधित गवाहों के बयान, सबूत आदि का Examination Cross और Examination पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया.
इस आदेश के आलोक में दूसरी बार विभागीय कार्यवाही शुरू हुई. लेकिन दूसरे संचालन पदाधिकारी ने भी राकेश कुमार को आरोप मुक्त कर दिया. दूसरे संचालन पदाधिकारी ने हाईकोर्ट द्वारा राकेश कुमार के खिलाफ थाने में दर्ज प्राथमिकी और हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा मामले में लिये गये संज्ञान को निरस्त करने को आधार बनाया. कोर्ट के फैसले के आधार पर दूसरी संचालन पदाधिकारी ने भी राकेश कुमार को आरोप मुक्त कर दिया.
दूसरे संचालन पदाधिकारी ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. सरकार ने विभागीय कार्यवाही की रिपोर्ट की समीक्षा की. इसमें यह पाया गया कि हाइकोर्ट ने मेरिट के बदले समझौता के आधार पर प्राथमिकी और संज्ञान को निरस्त किया था. विभाग ने न्यायालय से जुड़े मामले की समीक्षा में पाया की घटना के सिलसिले में पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने संज्ञान लिया था. न्यायालय ने IPC, Juvenile Justice Act 2015, Child Labour Act 2016 की धाराओं के तहत संज्ञान लिया था.
इसके बाद राकेश कुमार ने झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें न्यायालय द्वारा लिये गये संज्ञान और थाने में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था. साथ ही एक समझौता पत्र भी दायर किया गया था. इसमें यह कहा गया था कि पीड़ित पक्ष और अभियुक्तों के बीच कोर्ट से बाहर समझौता हो गया है. पीड़ित पक्ष अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है.
न्यायालय ने आपसी समझौता के आधार पर निचली अदालत द्वारा लिये गये संज्ञान और थाने में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया था. विभाग ने मामले की समीक्षा के दौरान पाया कि प्राथमिकी को समझौता के आधार पर निरस्त किया गया था, मेरिट के आधार पर नहीं. इसलिए सरकार ने राकेश कुमार के खिलाफ तीसरे बार विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश दिया.
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