Ranchi News: झारखंड में निवेश के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में सरकार नाकाम रही है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा कि सरकार निवेश और एमओयू के दावे करती है, लेकिन कितने उद्योग स्थापित हुए और कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिला, इसका हिसाब नहीं है. झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के औद्योगिक सकल मूल्यवर्धन में लोहा-इस्पात क्षेत्र की हिस्सेदारी 72.4 प्रतिशत है. वर्ष 2023-24 में एफडीआई निवेश 90 करोड़ रुपये रहा लेकिन राष्ट्रीय एफडीआई में राज्य की हिस्सेदारी महज एक प्रतिशत थी.
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शोभा यादव के अनुसार 2025-26 के पहले नौ महीनों में 83,363 एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण हुआ. इनमें 99 प्रतिशत से अधिक सूक्ष्म इकाइयां हैं. उन्होंने सवाल किया कि इन इकाइयों को बड़े औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं.
उन्होंने बताया कि 2024-25 में औद्योगिक नीति के तहत 184.51 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया. खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 95 इकाइयां स्थापित हुईं, जिनमें 676 करोड़ रुपये का निवेश हुआ और 4,917 लोगों को रोजगार मिला. उन्होंने पूछा कि प्रोत्साहन राशि से कितनी नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं और कितने स्थायी रोजगार पैदा हुए.
भाजपा प्रवक्ता ने पिछले पांच वर्षों के एमओयू, वास्तविक निवेश, स्थापित और बंद उद्योगों, सब्सिडी वितरण तथा स्थानीय रोजगार का जिला-वार श्वेत पत्र जारी करने की मांग की. उन्होंने लॉजिस्टिक पार्क और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परियोजनाओं में भी तेजी लाने की जरूरत बताई.
उन्होंने कहा कि झारखंड में कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बनाने वाले उद्योग विकसित होने चाहिए. इससे स्थानीय युवाओं को राज्य में ही रोजगार मिल सकेगा और उन्हें दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा.
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