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SC-HC के आदेश के बाद भी झारखंड के थानों में अब तक नहीं लगा CCTV, दो बार टेंडर रद्द...

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी झारखंड के सभी पुलिस थानों और सिविल कोर्ट परिसरों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं. कई साल बीत जाने के बाद कार्य अधूरा है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
 

Ranchi :  सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी झारखंड के सभी पुलिस थानों और सिविल कोर्ट परिसरों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं. कई साल बीत जाने के बाद कार्य अधूरा है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

 

जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी कैमरा लगाने की जिम्मेदारी जेपआईटी (JPIT) को दी गई थी. इस परियोजना के लिए दो टेंडर भी निकाला गया. लेकिन “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया गया है. 

 

सूत्रों के मुताबिक, टेंडर रद्द होने के पीछे तकनीकी खामियां, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल और योग्य एजेंसियों की कमी जैसे कारण बताए जा रहे हैं. हालांकि, विभाग की ओर से इन “अपरिहार्य कारणों” को लेकर कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है, जिससे संदेह और गहरा गया है.

 

योजना में देरी पर विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इधर, झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद इस योजना में हो रही देरी को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. कोर्ट ने थानों और सरकारी संस्थानों में सीसीटीवी लगाने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया था, ताकि कानून-व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके. इसके बावजूद बार-बार टेंडर रद्द होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि बजट स्वीकृति में देरी, तकनीकी मानकों में लगातार बदलाव और विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर समन्वय की कमी के कारण यह परियोजना प्रभावित हो रही है. इस संबंध में जेपआईटी के डायरेक्टर ए. सुनील कुमार का पक्ष जानने की कोशिश की गई. लेकिन उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

 

हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान से दायर की गई थी जनहित याचिका

बता दें कि राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान से जनहित याचिका दर्ज की गई थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य में अब तक CCTV नहीं लगाए जाने पर नाराजगी जताई थी.

 

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि अपराध नियंत्रण और पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए सभी थानों में CCTV कैमरे लगाना बेहद जरूरी है, लेकिन इसमें लगातार टालमटोल किया जा रहा है, जो उचित नहीं है.

 

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने झारखंड सरकार के गृह, जेल एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें राज्य भर के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने की स्पष्ट समय-सीमा बताने को कहा गया था.

 

सरकार का आधिकारिक शपथ पत्र मानने से कोर्ट ने किया गया था इनकार 

इससे पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्यालय-1, रांची की ओर से एक प्रति-शपथपत्र दायर किया गया था, लेकिन कोर्ट ने इसे राज्य सरकार का आधिकारिक शपथ पत्र मानने से इनकार कर दिया था.

 

खंडपीठ ने कहा था कि इसमें केवल 16 अप्रैल 2024 को जेपआईटी के माध्यम से राज्य भर के थानों में 334 CCTV कैमरे लगाने के प्रस्ताव का जिक्र है. चूंकि इस प्रस्ताव के बाद डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है, इसलिए कोर्ट ने प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया.

 

 

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