Dhanbad : खनन क्षेत्र में तेजी से बढ़ती तकनीक और सख्त सुरक्षा उपायों के चलते कोयला खदानों में दुर्घटनाओं में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है. कोयला खदानों में दुर्घटना दर 0.93 से घटकर 0.12 तक पहुंच गई है. यह खान सुरक्षा की दिशा में डीजीएमएस (महानिदेशालय खान सुरक्षा) की बड़ी उपलब्धि है. डीजीएमएस अब वर्ष 2047 तक शून्य दुर्घटना और शून्य हार्म के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
डीजीएमएस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कोयला खदानों में दुर्घटनाओं में यह कमी सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन और खदान कर्मियों के लिए सुरक्षित एवं जोखिम-मुक्त कार्य वातावरण तैयार करने का परिणाम है. यह उपलब्धि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर खनन क्षेत्र के योगदान को भी दर्शाती है. डीजीएमएस के महानिदेशक उज्जवल ताह ने बताया कि दुर्घटनाओं में आई कमी के पीछे तकनीक की अहम भूमिका रही है. जैसे-जैसे भारत तकनीकी रूप से सशक्त हो रहा है वैसे-वैसे खनन क्षेत्र में भी सुरक्षा मानकों में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि कोयला खनन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर और प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. यह सफलता डीजीएमएस के संगठनात्मक ढांचे, खान सुरक्षा विधानों और निरंतर निगरानी का नतीजा है. उन्होंने यह भी बताया कि केवल कोल माइंस ही नहीं बल्कि मेटल खनिज खदानों में भी सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार मेटल खनिज खदानों में दुर्घटना दर 0.74 से घटकर 0.23 तक पहुंच गई है.
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