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धनबादः अवैध लॉटरी के सिंडिकेट में बड़ा उलटफेर, अब दीपक तिवारी-गुड्डू खान को कमान !

Dhanbad : धनबाद कोयलांचल में अवैध लॉटरी के कारोबार से जुड़े सिंडिकेट में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि लंबे समय से इस धंधे पर वर्चस्व रखने वाले पवन झुनझुनवाला अब हाशिये पर चला गया है. उसकी जगह दीपक तिवारी व गुड्डू खान की जोड़ी ने अवैध लॉटरी के नेटवर्क को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी कर ली है.


सूत्रों के मुताबिक हाल ही में शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में लॉटरी सिंडिकेट की गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की घोषणा हुई. इस बैठक में पूरे धनबाद जिले को कई हिस्सों में बांटकर संचालन और सप्लाई की जिम्मेदारियां तय की गईं.
चर्चा है कि बैठक में सिंडिकेट के सदस्यों ने यह दावा किया कि उन्हें कथित तौर पर प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ी रोक-टोक नहीं है जिसके चलते वे बेखौफ होकर नेटवर्क फैलाने में जुट गए हैं. दीपक तिवारी जो पूर्व में कोयला कारोबार से जुड़ा रहा है अब अवैध लॉटरी के जरिए मोटा मुनाफा कमाने की रणनीति पर काम कर रहा है.

 

सूत्रों के अनुसार, झरिया व बलियापुर क्षेत्र की कमान बाटा मोड़ निवासी निक्की वर्मा को सौंपी गई है. बताया जाता है कि निक्की वर्मा का नेटवर्क झारखंड से लेकर पश्चिम बंगाल के बराकर तक फैला हुआ है. झरिया क्षेत्र में उसके सहयोग के लिए समीर अंसारी, तनवीर अंसारी, अनिल वर्मा व गणेश साव की टीम सक्रिय की गई है. वहीं निरसा क्षेत्र का जिम्मा पूर्व में जेल जा चुके आनंद साव को दिया गया है. उसके साथ अजीत साव, पिंटू साव, चंदन साव और अजय साव जैसे नाम जुड़े बताए जा रहे हैं. सिंडिकेट का दावा है कि इन लोगों को स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों का संरक्षण भी प्राप्त है.


बाघमारा क्षेत्र में अवैध लॉटरी के संचालन की जिम्मेदारी पप्पू चौहान और उसके कथित पप्पू सिंडिकेट को दी गई है. जबकि धनबाद, गोविंदपुर शहरी व ग्रामीण इलाकों में साव सिंडिकेट को लॉटरी की सप्लाई व संचालन का काम सौंपा गया है.


सूत्र बताते हैं कि सिंडिकेट से जुड़े लोगों में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई इलाकों में खुलेआम अवैध लॉटरी का धंधा चलाया जा रहा है. इसका सीधा असर गरीब व मजदूर तबके पर पड़ रहा है. अमीर बनने के लालच में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले लोग इस जुए में फंसकर कर्ज व बदहाली की ओर धकेले जा रहे हैं. कई परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना तक मुश्किल होता जा रहा है. अब सवाल यह उठ रहा है कि प्रशासन इस अवैध कारोबार पर कब और कैसे शिकंजा कसता है. या फिर लॉटरी सिंडिकेट इसी तरह कानून को चुनौती देता रहेगा.


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