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धनबाद: 10 फरवरी से शुरू फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, घर-घर जाएंगे स्वास्थ्य कर्मी

जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाएगा. अभियान के तहत 10 फरवरी को जिले के 2262 बूथों पर 4583 दवा प्रशासकों द्वारा 26 लाख से अधिक लोगों को अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
 

Dhanbad: जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाएगा. अभियान के तहत 10 फरवरी को जिले के 2262 बूथों पर 4583 दवा प्रशासकों द्वारा 26 लाख से अधिक लोगों को अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

 

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 435 सुपरवाइजरों की प्रतिनियुक्ति की गई है. जो लोग पहले दिन दवा लेने से वंचित रह जाएंगे. उन्हें 11 से 25 फरवरी तक घर-घर जाकर डीईसी एवं एल्बेंडाजोल दवा दवा प्रशासकों द्वारा अपने सामने खिलाई जाएगी. 

 

उपायुक्त ने लोगों से की अपील

स्वास्थ्य विभाग की बैठक के दौरान उपायुक्त आदित्य रंजन ने सभी लोगों से अभियान में भाग लेकर अनिवार्य रूप से दवा सेवन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन तभी संभव है जब शत-प्रतिशत लोग दवा का सेवन करें. अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी 435 सुपरवाइजरों की उपस्थिति कंट्रोल रूम से वीडियो कॉल के माध्यम से ली जाएगी. 

 

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कंट्रोल रूम से कॉल करने पर कोई सुपरवाइजर फोन रिसीव नहीं करता है तो यह माना जाएगा कि वह अपने निर्धारित स्थल पर उपस्थित नहीं है. उन्होंने सुपरवाइजरों को यह भी निर्देश दिया कि कोई भी घर या व्यक्ति अभियान से छूटना नहीं चाहिए और सभी लक्षित लोगों को दवा अवश्य खिलाई जाए.

 

30 जनवरी से कुष्ठ रोग खोज अभियान शुरू

उपायुक्त ने 30 जनवरी से शुरू होने वाले कुष्ठ जागरूकता एवं कुष्ठ रोग खोज अभियान की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक किया जाए कि कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही वंशानुगत रोग है. समय पर इलाज एवं नियमित दवा सेवन से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है. सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसका इलाज एवं दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं.

 

फाइलेरिया दूसरी लाइलाज बीमारी

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने बताया कि फाइलेरिया दिव्यांगता उत्पन्न करने वाली दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी लाइलाज बीमारी मानी जाती है. लेकिन वर्ष में एक बार डीईसी और एल्बेंडाजोल की खुराक लेने से इस पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ सब सेंटर, सदर अस्पताल, SNMMCH तथा धनबाद रेलवे स्टेशन पर भी लोगों को दवा खिलाई जाएगी. 

 

दवा सेवन का उम्र

उन्होंने बताया कि 1–2 वर्ष के बच्चों के लिए एल्बेंडाजोल की आधी गोली (200 एमजी) पानी में घोलकर, 2–5 वर्ष के बच्चों के लिए डीईसी की 1 गोली (100 एमजी) + एल्बेंडाजोल 1 गोली (400 एमजी), 6–14 वर्ष के लिए डीईसी 2 गोली (200 एमजी) + एल्बेंडाजोल 1 गोली, 15 वर्ष से अधिक के लिए डीईसी 3 गोली (300 एमजी) + एल्बेंडाजोल 1 गोली लेनी है.

 

गर्भवती महिला, वृद्ध, बीमार के लिए सावधानी

वहीं एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, अत्यंत वृद्ध एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है. उन्होंने यह भी बताया कि दवा सेवन के बाद यदि किसी व्यक्ति के शरीर में माइक्रो फाइलेरिया की मौजूदगी होगी, तो उसे हल्का बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द हो सकता है. जो सामान्य है और कुछ समय में स्वतः ठीक हो जाता है. 

 

बैठक में ये रहें शामिल

बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा, डॉ. रोहित गौतम, वीबीडी पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार, वीबीडी सलाहकार रमेश कुमार सिंह, स्टेट मलेरिया ऑफिसर डॉ. बिरेंद्र कुमार सिंह, स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. अभिषेक पॉल, डॉ. दीपाली, डीपीएम प्रतिमा कुमारी, डॉ. मंजू दास, रणधीर कुमार, जितेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए.

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