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धनबादः कागज-पेंसिल से सजीं विद्या की देवी, पर्यावरण संरक्षण की थीम पर बन रहा पूजा पंडाल

Dhanbad : धनबाद कोयलांचल की सांस्कृतिक पहचान बन चुके हीरापुर के झारखण्ड मैदान में इस वर्ष सरस्वती पूजा कुछ खास होने जा रही है. सत्यम शिवम सुंदरम पूजा कमेटी की ओर से इस बार न केवल पंडाल, बल्कि मां सरस्वती की प्रतिमा भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली कागज से तैयार की जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देगी.

कला ऐसी, जो थमा दे निगाहें


इस बार पंडाल के निर्माण में प्लास्टिक, थर्मोकोल या केमिकल रंगों का कहीं भी उपयोग नहीं किया गया है. पूरी संरचना कागज से तैयार हो रही है जिसे देखकर श्रद्धालु हैरान रह जाएंगे. यही नहीं, मां सरस्वती की प्रतिमा को भी विशेष कलात्मक अंदाज में सजाया जा रहा है. कागज की परतों से गढ़ी जा रही इस प्रतिमा में बारीक शिल्पकला व रंगों का संतुलन अद्भुत दिखाई देगा.

300 से 400 पेंसिलों से बनी वीणा


मां सरस्वती के हाथों में विराजमान वीणा इस पंडाल का मुख्य आकर्षण होगा. इसे तैयार करने में 300 से 400 पेंसिलों का उपयोग किया जा रहा है. पेंसिलों को इस तरह जोड़ा गया है कि ये न केवल सुंदर दिखें, बल्कि शिक्षा व ज्ञान के प्रतीक के रूप में भी गहरा संदेश दें. इस भव्य कलाकृति की एक और खास बात यह है कि इसके निर्माण में किसी बाहरी कलाकार की मदद नहीं ली गई है. कमेटी के 50 से अधिक सदस्य स्वयं दिन-रात मेहनत कर पंडाल व प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं. युवाओं से लेकर वरिष्ठ सदस्यों तक सभी इसमें अपनी भागीदारी निभा रहे हैं.

 

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता है. त्योहारों के दौरान बढ़ने वाला प्रदूषण चिंता का विषय है. इसी सोच के तहत इस वर्ष कागज व पेंसिल जैसे साधनों को माध्यम बनाकर लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि आस्था के साथ पर्यावरण की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि करीब 4 लाख के बजट से तैयार हो रहा यह पंडाल समाज को यह प्रेरणा देगा कि कम खर्च और प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग से भी भव्य आयोजन संभव है.

 

झारखण्ड मैदान की अलग पहचान

झारखण्ड मैदान में स्थित सत्यम शिवम सुंदरम कमेटी हर वर्ष अपनी अलग थीम के कारण चर्चा में रहती है.पिछले वर्ष कमेटी ने रस्सी और चटाई से निर्मित पंडाल बनाकर हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित किया था. इस बार कागज और पेंसिल का यह अभिनव प्रयोग धनबाद के पूजा पंडालों में नई मिसाल कायम करने जा रहा है. 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा को लेकर तैयारियां अब अंतिम दौर में हैं.

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