Dhanbad : महिलाओं के मासिक धर्म (पीरियड्स) की अनियमितता को नजरअंदाज करना जानलेवा बन सकता है. इसका ताजा उदाहरण धनबाद के सदर अस्पताल में सामने आया. जटिल स्त्रीरोग से पीड़ित महिला का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई गई. लाल बंगला निवासी 41 वर्षीय संतोषी देवी पिछले करीब छह महीनों से अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या से जूझ रही थीं. लगातार खून बहने के कारण उनकी स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी.
तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन महिला को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. जांच में उनका हीमोग्लोबिन मात्र 5.8 ग्राम पाया गया. डॉक्टरों ने तुरंत दो यूनिट खून चढ़ाकर मरीज की स्थिति संभाली. आगे की जांच में पता चला कि महिला के गर्भाशय में सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड (गांठ) है जो गर्भाशय की अंदरूनी परत के नीचे विकसित होता है और अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है. डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार प्रसाद के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक टोटल हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय हटाने) ऑपरेशन किया. फिलहाल, मरीज की स्थिति स्थिर और संतोषजनक है.मरीज का आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा इलाज निःशुल्क किया गया.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डॉ. संजीव कुमार प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड के प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक रक्तस्राव ,लंबे समय तक पीरियड्स चलना और शरीर में खून की कमी (एनीमिया) शामिल हैं. समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं में सामान्य मासिक चक्र 21 से 35 दिनों के बीच होता है और 2 से 7 दिनों तक रक्तस्राव होना सामान्य माना जाता है. इससे अधिक या कम होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.
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