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धनबादः केंदुआडीह गैस रिसाव; PMRC की टीम ने संभाला मोर्चा, नाइट्रोजन इंजेक्शन शुरू

Dhanbad : धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में बीते कई दिनों से जारी गैस रिसाव की समस्या प्रशासन और वैज्ञानिक टीम के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है. गैस के रिसाव से आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है. प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी उपायों के साथ विशेषज्ञों की टीम मौके पर डटी हुई है. गैस रिसाव पर नियंत्रण के लिए पीएमआरसी (पेट्रो माइंस रिसर्च सेंटर) की टीम ने गुरुवार से नाइट्रोजन इंजेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.


पीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रो. बीसी पाणिग्रही ने बताया कि नाइट्रोजन इंजेक्शन से पहले बोरहोल की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई गई है. पहले 6 इंच का बोरहोल किया गया, उसके बाद 3 इंच का बोरहोल कर गैसिंग की गई, फिर नाइट्रोजन इंजेक्शन शुरू किया गया. उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान गैस कंट्रोल की विजन मॉनिटरिंग की जा रही है जिससे यह आकलन किया जा सके कि गैस रिसाव पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो रहा है.


प्रो. पाणिग्रही ने बताया कि नियंत्रण की गति अंदर की स्थिति पर निर्भर करती है. क्योंकि अंदर की वास्तविक परिस्थितियां प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देतीं. अनुमान और तकनीकी आकलन के आधार पर ही स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है. यदि अंदर कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं रही, तो हालात जल्द सामान्य हो सकते हैं. अन्यथा इसमें कुछ और समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन इंजेक्शन से ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है और कूलिंग इफेक्ट उत्पन्न होता है जिससे अंदर चल रही रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.


उन्होंने कहा कि इलाके में तीन स्थानों पर बोरहोल किया जाना है. इनमें से पहला प्वाइंट पूरा किया जा चुका है. दूसरे प्वाइंट पर जल्द काम शुरू होगा, जबकि तीसरा प्वाइंट बाउंड्री के पास होने के कारण अंत में किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान मिथेन गैस की मौजूदगी सामने आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंदर की रिएक्शन अभी भी सक्रिय है. क्षेत्र में सामान्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मिथेन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैस मौजूद हैं.

 

पीएमआरसी के चीफ साइंटिस्ट नागेश्वर शाहा ने बताया कि फायर कंट्रोल की स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम लगातार काम कर रही है. पहले की तुलना में अब हालात में काफी हद तक नियंत्रण आया है और नाइट्रोजन फिलिंग की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से जारी है. टीम द्वारा 72 घंटे तक लगातार टैंकर चलाकर परिणामों का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.

 

वहीं, प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.


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