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धनबादः IIT-ISM में राष्ट्रीय सेमिनार शुरू, पर्यावरणीय संतुलन व खनन पर मंथन

प्रोग्राम कॉर्डिनेटर प्रो. बिश्वजीत पॉल ने कहा कि खनन देश की आर्थिक रीढ़ है. लेकिन चुनौती यह है कि खनन इस प्रकार किया जाए, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े. भारत को कोयला, लौह अयस्क, एल्युमिनियम जैसे खनिजों की आवश्यकता है.
 

Dhanbad : देश के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए IIT-ISM, धनबाद में शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ. यह इस श्रृंखला का 35वां राष्ट्रीय सेमिनार है, जिसमें देशभर के खनन विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि व शिक्षाविद भाग ले रहे हैं. सेमिनार का उद्घाटन IIT-ISM के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार व प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर प्रो. बिश्वजीत पॉल ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर डीजीएमएस के महानिदेशक उज्ज्वल ताह, सेल चेयरमैन अमरेंदु प्रकाश, बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, एचसीएल के सीएमडी संजीव कुमार सिंह, द इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के अध्यक्ष वीबी सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.


प्रोग्राम कॉर्डिनेटर प्रो. बिश्वजीत पॉल ने कहा कि खनन देश की आर्थिक रीढ़ है. लेकिन चुनौती यह है कि खनन इस प्रकार किया जाए, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े. भारत को कोयला, लौह अयस्क, एल्युमिनियम जैसे खनिजों की आवश्यकता है. इनका खनन सतत और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ करना समय की मांग है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2070 तक खनन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर तक लाया जाए.


 इसके लिए नई तकनीकों और डिजिटल माइनिंग समाधानों का विकास आवश्यक है. सेमिनार में विशेषज्ञ सतत और सुरक्षित माइनिंग, पर्यावरणीय संतुलन, क्रिटिकल मिनरल्स, डिजिटल तकनीकों के उपयोग तथा ऊर्जा परिवर्तन रणनीति जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे. सस्टेनेबल माइनिंग के लिए कार्यबल को सशक्त बनाने पर भी विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा.


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