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Dhanbad News: छह साल बाद हुई BBMKU में सीनेट की बैठक, 4 घंटे में मात्र 9-10 एजेंडो पर चर्चा

Dhanbad News: BBMKU विश्वविद्यालय के तीसरी सीनेट बैठक में महज 9 से 10 एजेंडों पर ही चर्चा हो सकी. नतीजतन कई अहम मुद्दों पर निर्णय के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और सीनेट सदस्यों को अब अगली बैठक का इंतजार करना होगा. सीनेट की अगली बैठक 30 नवंबर को निर्धारित की गई है. इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर भी चर्चा होगी.
 
BBMKU में सीनेट की बैठक

Dhanbad News: बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुधार, छात्रों की नियमित उपस्थिति, क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई और कर्मचारियों के वेतन-पेंशन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए तीसरी सीनेट की बैठक हुई. करीब चार घंटे तक चली बैठक में लगभग 27 एजेंडों में से महज 9 से 10 एजेंडों पर ही चर्चा हो सकी.


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नतीजतन कई अहम मुद्दों पर निर्णय के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और सीनेट सदस्यों को अब अगली बैठक का इंतजार करना होगा. सीनेट की अगली बैठक 30 नवंबर को निर्धारित की गई है. इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर भी चर्चा होगी.

 

करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को हुई इस बैठक में धनबाद के विधायक राज सिन्हा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक सहित अन्य सदस्य शामिल हुए. 


वेतन-पेंशन के भुगतान को मंजूरी

बैठक में कर्मचारियों के वेतन भुगतान और पेंशन से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी मिली. इसके अलावा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के लिए किताबें खरीदने के मद में सरकार को वापस हो चुकी राशि दोबारा उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया. सदस्यों ने प्रयोगशालाओं के लिए आवंटित राशि का जल्द से जल्द उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया ताकि उपलब्ध संसाधनों का लाभ विद्यार्थियों को मिल सके.
75% से कम उपस्थिति पर परीक्षा फॉर्म भरने से रोक की मांग


सीनेट की बैठक में छात्रों की नियमित उपस्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा. चंदनकियारी के विधायक उमाकांत रजक ने कॉलेजों और विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग की. उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम है उन्हें परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

 

क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई शुरू कराने पर जोर

सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो ने बीबीएमकेयू में क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू कराने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कुड़माली, खोरठा और संथाली जैसी भाषाओं को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत बताई.उनका जोर था कि क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को उच्च शिक्षा से जोड़ा जाए ताकि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में अध्ययन के अवसर मिल सकें.

 

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